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हिसार : हकृवि में युवाओं ने सीखी कम लागत में ज्यादा मुनाफे की आधुनिक तकनीकें

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हिसार : हकृवि में युवाओं ने सीखी कम लागत में ज्यादा मुनाफे की आधुनिक तकनीकें


आने वाले समय की टिकाऊ, आधुनिक और लाभकारी कृषि प्रणाली साबित हो सकती संरक्षित

खेती : डॉ. अशोक गोदारा

हिसार, 10 अगस्त (हि.स.)। खेती में बढ़ती लागत, घटते जल संसाधन और सीमित भूमि

के बीच संरक्षित खेती किसानों और युवाओं के लिए आमदनी बढ़ाने और स्वरोजगार का नया रास्ता

बन रही है। साेमवार काे हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय संरक्षित खेती प्रशिक्षण

कार्यक्रम में हरियाणा के विभिन्न जिलों से पहुंचे किसानों, युवाओं और उद्यमियों ने

आधुनिक कृषि तकनीकों को सीखा और इनके व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी हासिल की।

सायना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण एवं शिक्षा संस्थान की ओर से साेमवार काे आयोजित

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को संरक्षित खेती की आधुनिक तकनीकों से

रूबरू कराना और उन्हें कृषि को व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना

रहा। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि पॉलीहाउस और अन्य संरक्षित तकनीकों

के माध्यम से मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद वर्षभर सब्जियों, फूलों और उच्च

मूल्य वाली फसलों का उत्पादन किया जा सकता है। संस्थान के सह-निदेशक डॉ. अशोक गोदारा ने कहा कि सीमित भूमि और जल संसाधनों

को देखते हुए संरक्षित खेती आने वाले समय की टिकाऊ, आधुनिक और लाभकारी कृषि प्रणाली

साबित हो सकती है। प्रशिक्षण के मुख्य संयोजक डॉ. विकाश हुड्डा ने कहा कि संरक्षित

खेती युवाओं के लिए कृषि क्षेत्र में स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर सकती

है।

विशेषज्ञों ने सिखाए खेती के आधुनिक गुर

प्रशिक्षण में विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं

दी, बल्कि संरक्षित खेती से जुड़ी विभिन्न तकनीकों की बारीकियों से भी अवगत कराया।

डॉ. राम नरेश ने ड्रिप सिंचाई और फर्टिगेशन, डॉ. सुमित देसवाल ने मिट्टी रहित माध्यम

में सब्जी उत्पादन तथा डॉ. इंदु अरोड़ा ने ग्राफ्टिंग तकनीक की जानकारी दी। डॉ. धर्मबीर दुहन और डॉ. हंस राज ने पॉलीहाउस में टमाटर, खीरा और रंगीन शिमला

मिर्च की खेती की आधुनिक तकनीकों के बारे में बताया। डॉ. अरविंद मलिक ने उच्च मूल्य

वाले फूलों की व्यावसायिक खेती और इससे जुड़ी संभावनाओं पर प्रकाश डाला। डॉ. भूपेंद्र सिंह ने एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन, डॉ. सरदूल मान ने पॉलीहाउस

स्थापित करने से पहले मिट्टी में सूत्रकृमि की जांच और डॉ. सतीश मेहता ने मिर्च एवं

टमाटर में होने वाले लीफ कर्ल रोग की रोकथाम और प्रबंधन की जानकारी दी। समापन अवसर पर डॉ. संदीप भाकर सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

अधिकारियों ने प्रशिक्षण में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित

किए।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर