हिसार : डॉ. नीरज मलिक के दो शोध अमेरिका की पुस्तकों में प्रकाशित, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया नाम रोशन
डॉ. नीरज मलिक सीआर लॉ कॉलेज हिसार में सहायक
प्राध्यापक
हिसार, 29 अगस्त (हि.स.)। शहर के सीआर लॉ कॉलेज
के सहायक प्राध्यापक डॉ. नीरज मलिक के दो शोध-अध्याय अमेरिका के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय
प्रकाशन संस्थान नोवा साइंस पब्लिशर्स, न्यूयॉर्क द्वारा प्रकाशित पुस्तक में प्रकाशित
हुए हैं। यह पुस्तक प्रकाशक की ‘हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म एंड मार्केटिंग स्टडीज़ सीरीज़’ के अंतर्गत वर्ष 2026 में प्रकाशित हुई है। इस उपलब्धि से डॉ. नीरज मलिक ने
जाट एजुकेशनल सोसायटी एवं गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का
नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।
पुस्तक का संपादन मिदनापुर कॉलेज, पश्चिम बंगाल
के डॉ. मनीश्री मंडल, एशिया पैसिफिक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन, कुआलालंपुर,
मलेशिया के डॉ. अहमद अलबत्तात, निकोलो कुसानो यूनिवर्सिटी, इटली के डॉ. मार्को वालेरी
व चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के प्रो. पंकज कुमार त्यागी ने किया है। पुस्तक में कुल पंद्रह
अध्याय हैं, जिनमें भारत के अतिरिक्त तुर्किये, मलेशिया, इटली और मोंटेनेग्रो के शोधकर्ताओं
के अध्याय सम्मिलित हैं।
डॉ. मलिक का पहला अध्याय पुस्तक के द्वितीय खंड
(विधिक, नैतिक एवं व्याख्यात्मक परिप्रेक्ष्य) में अध्याय-5 के रूप में प्रकाशित हुआ
है, जिसे उन्होंने अदित्य करवासरा के साथ लिखा है। अध्याय में इस प्रश्न की गहन विवेचना
की गई है कि जब अपराध-स्थल और त्रासदी-स्थल पर्यटन केंद्रों में बदल जाते हैं, तब पीड़ितों
के अधिकार, स्मृति की गरिमा और व्यावसायीकरण के बीच संतुलन किस प्रकार स्थापित किया
जाए। लेखकों ने सुझाव दिया है कि राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे स्थलों के लिए स्पष्ट विधिक
ढांचा बनाया जाए तथा डार्क टूरिज्म को व्यावसायिक तमाशे के बजाय शिक्षा और इतिहास-बोध
के सशक्त माध्यम के रूप में विकसित किया जाए।
दूसरा अध्याय पुस्तक में अध्याय-8 के रूप में
सम्मिलित है, जिसे डॉ. मलिक ने सुश्री हसीना रानी के साथ लिखा है। इस अध्याय में वर्ष
1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड से जुड़े स्मारक स्थल के संरक्षण, उससे संबंधित विधिक
प्रावधानों तथा आमजन में ऐतिहासिक स्मृति एवं सामाजिक जागरूकता के स्तर का विश्लेषण
प्रस्तुत किया गया है। अध्याय-5 के सह-लेखक अदित्य करवासरा यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट
ऑफ लीगल स्टडीज़ (यूआईएलएस), चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, मोहाली (पंजाब) में सहायक प्राध्यापक
हैं। इनकी शोध-रुचि संवैधानिक विधि तथा विधिक समाजशास्त्र में है। डिजिटल स्पेस के
नियमन तथा पर्यटन के संदर्भ में पीड़ितों के अधिकारों जैसे उभरते हुए विषयों पर इनके
शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। विधिक शोध में सैद्धांतिक विश्लेषण के साथ ऐतिहासिक
परिप्रेक्ष्य एवं क्षेत्रीय अनुभवों को जोड़ने की अंतरविषयक दृष्टि इनके कार्य की विशेषता
रही है, तथा प्रस्तुत अध्याय में भी व्यावसायिक हितों और मानवीय गरिमा के बीच संतुलन
स्थापित करने में विधि की भूमिका को रेखांकित किया गया है।
अध्याय-8 की सह-लेखिका हसीना रानी सीआर लॉ कॉलेज
में सहायक प्राध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ एंड रिसर्च,
फरीदाबाद से वर्ष 2019 में ऑनर्स सहित विधि स्नातक तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से
वर्ष 2021 में एलएलएम की उपाधि प्राप्त की है। उनकी शोध-रुचि संवैधानिक अधिकारों, किशोर
न्याय एवं समसामयिक विधिक मुद्दों में है तथा इच्छामृत्यु, लिव-इन संबंध, किशोर विधि
एवं आयु-आधारित विधिक प्रावधानों जैसे विषयों पर उनके शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।
डॉ. नीरज मलिक ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय,
रोहतक से एलएलबी (2007) एवं एलएलएम (2010) तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से वर्ष
2018 में विधि में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। उन्हें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग,
नई दिल्ली की जूनियर रिसर्च फेलोशिप तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मध्य प्रदेश द्वारा
‘बेस्ट एकेडमिशियन अवार्ड’ से सम्मानित किया जा चुका है। आपराधिक विधि,
मानवाधिकार, पर्यटन विधि एवं पर्यावरणीय न्यायशास्त्र उनकी विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

