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अब शामलात भूमि से निजी परियोजनाओं के लिए रास्ता सुनिश्चित

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चंडीगढ़, 08 अप्रैल (हि.स.)। हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में गांव की शामलात भूमि (साझा भूमि) से निजी परियोजनाओं तक पहुंच के लिए रास्ता बनाने की नीति को मंजूरी दी है। राज्य में अब यह संभव होगा कि यदि किसी निजी परियोजना के लिए ज़रूरी भूमि तक कोई उपयुक्त मार्ग नहीं है, तो ग्राम पंचायत की सहमति और ग्राम सभा के बहुमत से नया रास्ता निर्धारित किया जा सके।

इस कदम का उद्देश्य निजी निवेशकों को परियोजना भूमि तक सरल पहुंच प्रदान करना है, साथ ही पंचायत और ग्रामीणों के हितों की रक्षा करना है। नीति के अनुसार यह रास्ता पूरी तरह पंचायत के स्वामित्व में रहेगा और सभी लोग इसे साझा रूप से उपयोग कर सकेंगे। रास्ता बनाने के लिए परियोजना क्षेत्र के 5 फीसद हिस्से का स्वामित्व या ग्राम पंचायत द्वारा तय की गई भूमि के चार गुना क्षेत्र का आदान-प्रदान अनिवार्य होगा।

इस नई नीति से बुनियादी ढांचा, आवासीय और औद्योगिक परियोजनाओं के विकास में पारदर्शिता और सुगमता बढ़ेगी। बुधवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस पर सहमति बनी। बैठक में वृद्धजनों की सुविधा और कानूनी प्रक्रियाओं में सुधार की दिशा में भी अहम कदम उठाया है। रिटायरमेंट हाउसिंग नीति वृद्धजनों के जीवन स्तर को बेहतर बनाएगी।

मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि इन फैसलों का उद्देश्य राज्य में विकास को गति देना, सामाजिक समावेशिता बढ़ाना और कानूनी व्यवस्थाओं को सरल बनाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नई नीतियों का सही और पारदर्शी कार्यान्वयन सुनिश्चित करें। साझा भूमि रास्ता नीति से निजी परियोजनाओं के लिए ग्राम पंचायत से मंजूरी लेकर रास्ता तय किया जा सकेगा। रिटायरमेंट हाउसिंग नीति से वृद्धजनों के लिए बेहतर सुविधाएं और अतिरिक्त एफएआर सुविधा मिलेगी।

रिटायरमेंट हाउसिंग नीति में संशोधन

कैबिनेट ने रिटायरमेंट हाउसिंग पॉलिसी में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। राज्य के वृद्धजन अब और बेहतर सुविधाओं के साथ रिटायरमेंट कॉलोनियों में रह सकेंगे। संशोधन के अनुसार हस्तांतरणीय विकास अधिकार (टीडीआर) के माध्यम से फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाकर 3.0 कर दिया गया, जो पहले 2.25 था। इस बदलाव से डेवलपर्स और वृद्धजनों दोनों को लाभ मिलेगा। नीति में यह भी सुनिश्चित किया गया है कि आवासीय परियोजनाएं सभी मानक बुनियादी सुविधाओं जैसे पानी, बिजली, सड़क आदि तक पहुंच सुनिश्चित करें। इस निर्णय से रिटायरमेंट कॉलोनियों की योजना अधिक व्यवस्थित और समयानुकूल हो जाएगी।

पुरानी कानूनी धाराओं में सुधार

कैबिनेट ने पंजाब कोट्र्स एक्ट, 1918 के सेक्शन 30 में भी संशोधन को मंजूरी दी। पुराने कानूनों में इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1865 और प्रोबेट एंड एडमिनिस्ट्रेशन एक्ट, 1881 का उल्लेख था, जिसे अब इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 से बदल दिया गया है। इस बदलाव का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अब डिस्ट्रिक्ट जज संपत्ति विवादों और उत्तराधिकार से जुड़ी कार्रवाई कर सकेंगे। इससे कानूनी प्रक्रियाओं में स्पष्टता आएगी और पुराने रेफरेंस के कारण होने वाली उलझनों से बचा जा सकेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा