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बोर्ड परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ की फॉरेंसिक जांच में हुई पुष्टि

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बोर्ड परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ की फॉरेंसिक जांच में हुई पुष्टि


धर्मशाला, 22 मई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षा प्रणाली में एक बड़ी लापरवाही और छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। इस पर बोर्ड अध्यक्ष डॉ राजेश शर्मा ने कड़ा संज्ञान लिया है। डॉ शर्मा ने बताया कि मार्च-2025 में आयोजित मैट्रिक (10वीं) परीक्षा के दौरान बिलासपुर जिले के एक परीक्षा केंद्र में छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं के साथ कथित छेड़छाड़ की गई थी, जिसकी अब फॉरेंसिक जांच में पूरी तरह पुष्टि हो गई है। बोर्ड ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए प्रभावित छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें नियमानुसार अंकों का लाभ देने का बड़ा निर्णय लिया है। मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और जांच रिपोर्ट आगामी सख्त कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग को सौंप दिए गए हैं।

फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट ने खोली पोल

यह पूरा मामला बिलासपुर जिला के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला झंडूता परीक्षा केंद्र से जुड़ा है। इस केंद्र पर कुल 40 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, जिनमें राजकीय उच्च पाठशाला जेओरा के 11 छात्र भी शामिल थे। परीक्षा के बाद, कला संकाय विषय के 9 छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के एमसीक्यू (बहुविकल्पीय प्रश्न) भाग में छेड़छाड़ होने की लिखित शिकायत बोर्ड से की थी। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि शिकायत मिलने पर छात्रों को अक्टूबर 2026 में बोर्ड मुख्यालय बुलाकर विशेषज्ञों के सामने उत्तर पुस्तिकाएं दिखाई गईं। इसके बाद सच सामने लाने के लिए प्रतियों को क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला धर्मशाला भेजा गया, जहां लैब रिपोर्ट में छेड़छाड़ की बात सही पाई गई।

लिफाफे बदलने के खेल का भी हुआ पर्दाफाश

फॉरेंसिक रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद बोर्ड द्वारा गठित विशेष समिति ने जब इस पूरे मामले की परतें खोलीं, तो एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित रखने के लिए जिन 'टैंपर-प्रूफ' लिफाफों का इस्तेमाल किया गया था, उनके सीरियल नंबर पैकिंग मेमो में दर्ज नंबरों से मिल ही नहीं रहे थे। इससे यह साफ हो गया कि परीक्षा केंद्र या उसके बाद उत्तर पुस्तिकाओं के लिफाफों की अदला-बदली की गई थी।

विद्यार्थियों के हित में बोर्ड का बड़ा फैसला

बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि इस पूरी गड़बड़ी में छात्रों का कोई दोष नहीं है, इसलिए उनके शैक्षणिक हितों की रक्षा करना बोर्ड की पहली प्राथमिकता है। समिति की सिफारिशों के आधार पर बोर्ड ने निर्णय लिया है कि जिन प्रश्नों के साथ छेड़छाड़ हुई है, उन पर प्रभावित छात्रों को नियमानुसार पूरा लाभ (अंक) दिया जाएगा, ताकि उनके रिजल्ट और भविष्य पर कोई आंच न आए। उन्होंने दोहराया कि स्कूल शिक्षा बोर्ड परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस मामले के दोषियों के खिलाफ भविष्य में सख्त से सख्त कानूनी व विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया