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झज्जर में राष्ट्रीय मिल्ट्री स्कूल  की याेजना काे सिरे चढ़ाएगी नायब सरकार

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चंडीगढ़, 09 मार्च (हि.स.)। झज्जर जिले के मातनहेल गांव में करीब चार दशक से लंबित सैनिक स्कूल परियोजना को अब नया रूप देने की तैयारी शुरू हो गई है। हरियाणा विधानसभा में सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान सरकार ने स्पष्ट किया कि मातनहेल में सैनिक स्कूल की बजाय राष्ट्रीय मिल्ट्री स्कूल (आरएमएस) स्थापित किया जाएगा, जिसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर विकसित किया जाएगा। सैनिक व अर्द्ध-सैनिक मामलों के मंत्री राव नरबीर सिंह ने सदन में बताया कि केंद्र सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन संचालित होने वाला यह संस्थान प्रदेश के युवाओं को सैन्य शिक्षा और अनुशासन का बेहतर अवसर देगा। 1987 में तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस द्वारा शिलान्यास किए जाने के बावजूद परियोजना अब तक साकार नहीं हो पाई थी। झज्जर से विधायक गीता भुक्कल ने साेमवार काे सदन में यह मुद्दा उठाते हुए स्थानीय विद्यार्थियों और युवाओं के लिए सीटों व नौकरियों में आरक्षण की मांग भी रखी, जबकि अन्य मंत्रियों ने भी इस लंबे समय से लंबित मांग को पूरा कराने के प्रयासों का समर्थन किया।

इस दौरान जितनी सरकारें आईं, सभी के मुख्यमंत्रियों ने स्कूल के लिए रक्षा मंत्रालय से पत्राचार किया, लेकिन स्कूल की घोषणा सिरे नहीं चढ़ पाई। भूतपूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व मनोहर लाल खट्टर ने भी स्कूल के लिए चिट्ठी लिखी लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी। अब नायब सरकार ने भी इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं।

सैनिक व अर्द्ध-सैनिक मामले मंत्री राव नरबीर सिंह ने सदन में खुलासा किया कि सैनिक स्कूल की बजाय मातनहेल में पीपीपी मोड पर आरएमएस यानी केंद्रीय मिल्ट्री स्कूल स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। गीता भुक्कल चूंकि मातनहेल गांव की बेटी हैं, इसलिए उन्होंने सदन में मांग उठाई कि स्कूल में 10 प्रतिशत सीटें और ग्रुप-डी के कर्मचारियों के 10 प्रतिशत पद गांव के विद्यार्थियों व युवाओं के लिए आरक्षित किए जाएं।

राव नरबीर सिंह ने कहा कि चूंकि यह स्कूल डिफेंस मिनिस्टरी द्वारा चलाया जाएगा। ऐसे में इसमें नियम भी केंद्रीय मंत्रालय के ही लागू होंगे। आरक्षण का फैसला लेने का सरकार के पास अधिकार नहीं है। गीता भुक्कल ने बताया कि मातनहेल ग्राम पंचायत ने स्कूल के लिए 61 एकड़ पंचायती भूमि मुफ्त दी है। इस संदर्भ में ग्राम पंचायत द्वारा कई बार प्रस्ताव पास करके भेजे गए हैं। हाल ही में भी एक नया प्रस्ताव दिया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा