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युद्ध से पानीपत का धागा उद्योग संकट में, करोड़ों का हो रहा नुकसान

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युद्ध से पानीपत का धागा उद्योग संकट में, करोड़ों का हो रहा नुकसान


पानीपत, 26 अप्रैल (हि.स.)। ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के कारण पानीपत में धागा व्यवसाय को झटका लगा है। पानीपत में तकरीबन 150 स्पिनिंग मिल है। अब युद्ध की स्थिति के चलते छोटी मिलें बंद होने की कगार पर है। कारण कच्चे माल पर बढ़ती कीमतें है। जिस कारण तैयार माल की कीमतों में भी बढ़ोत्तरी हुई है। जिसका नतीजा यह है कि धागा व्यवसाय में अब 30 प्रतिशत की कमी आई है।

जिंदल स्पिनिंग मिल व शंकर वूलन मिल के एमडी सुरेंद्र जिंदल ने बताया कि युद्ध के कारण आयात होने वाला कच्चा माल नहीं आ पा रहा क्योंकि सैकड़ों कंटेनर समुद्र में ही फंसे हुए हैं।, पानीपत में विदेशों से हर माह एक हजार कंटेनर से अधिक माल रॉ मैटेरियल का आता था। जिस कारण कच्चे माॅल पर 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होने बताया कि लुब्रिकेंट ऑयल पर 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, और पीपी वारदाने पर 20 प्रतिशत, और सिंथेटिक वेस्ट पर 20 प्रतिशत तथा एक्सपोर्ट माल पर 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जिस कारण अन्य उत्पाद बनाने वाली फैक्ट्रियों ने उत्पादनों पर लगभग रोक लगा रखी हे, जब तक मूल्य स्थिर नहीं हो जाते।

श्री लक्ष्मी कोट्स एंड स्पिनिंग मिल के निदेशक मनोज गुप्ता ने बताया कि पानीपत में करीब 50 हजार किलो सोढी धागा जिसकी लगत करीब 70 रुपए प्रति किलो यानी 126 करोड़ रूपये सालाना का कारोबार होता है। तथा 15 लाख किलो कॉटन धागा रोज बनाया जाता है, जिसकी एक किलो धागे की कीमत 75 रुपए है। व चार हजार पांच सौ 36 करोड़ रूपये सालाना का कारोबार होता है। लेकिन अब ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के चलते पानीपत के डाई हाउस जहां धागों की रंगाई होती है वह तेल और गैस पर चलते है।

ज्यादातर बंद होने की कगार पर है। युद्ध के चलते तेल और गैस के आयात पर असर पड़ा है। जिससे निर्यात पर 20 से 30 प्रतिशत की लागत में बढ़ोतरी हुई है। जिस कारण तैयार माल पर 30 प्रतिशत अधिक का भार पड़ रहा इसी कारण इस कारोबार को करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। क्योंकि खरीदार पुराने मूल्य पर माल खरीदने की मांग करते है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल वर्मा