हिसार : डेयरी फार्मिंग को वैज्ञानिक तरीके से अपनाकर आमदनी बढ़ाएं किसान : डाॅ. अशाेक गाेदारा
हकृवि में पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में पशुपालकों को नस्ल, पोषण, रोग
नियंत्रण व प्रबंधन की दी जानकारी
हिसार, 13 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सायना नेहवाल कृषि
प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण एवं शिक्षा संस्थान की ओर से लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं
पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के सहयोग से किसानों, ग्रामीण युवाओं और पशुपालकों के लिए
पांच दिवसीय डेयरी फार्मिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के
विभिन्न जिलों से महिला एवं पुरुष प्रतिभागियों ने भाग लिया।
संस्थान के सह निदेशक डॉ. अशोक कुमार गोदारा ने रविवार काे कहा कि किसान कृषि के साथ वैज्ञानिक
डेयरी फार्मिंग को अपनाकर अपनी आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं। इसके लिए विश्वविद्यालय
लगाकार इस तरह के प्रशिक्षण शिविर आयोजित करके किसानों को जानकारी देता रहता है। उन्होंने
कहा कि यह ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार और उद्यमिता का महत्वपूर्ण क्षेत्र भी है।
प्रशिक्षण के दौरान पशु प्रजनन एवं जेनेटिक्स विभाग के डॉ. अनिल ने दुधारू
पशुओं की विभिन्न नस्लों की जानकारी दी। डॉ. नैंसी श्योराण ने पशुओं की दुग्ध उत्पादन
क्षमता, शरीर भार, गर्भावस्था और उत्पादन अवस्था के अनुसार संतुलित आहार देने पर जोर
दिया। डॉ. जसमेर दलाल ने संक्रामक एवं गैर संक्रामक रोगों के लक्षण, रोकथाम और नियंत्रण
की जानकारी दी। डॉ. महावीर सिंह ने थनैला रोग से बचाव और दुग्ध उत्पादन के लिए जरूरी
सावधानियां बताईं। डॉ. गौरव चराया ने पाचन संबंधी विकारों, जबकि डॉ. अंशुल लाठर ने
मुंह-खुर रोग के लक्षण और बचाव के उपाय बताए। डॉ. नीरज अरोड़ा ने हीट की सही पहचान,
समय पर कृत्रिम गर्भाधान, गर्भ जांच तथा ब्यांत के बाद पशुओं की देखभाल की जानकारी
दी। डॉ. आरएस दादरवाल, डॉ. नेहा और डॉ. सतीश जांगड़ा ने भी प्रतिभागियों को डेयरी
फार्मिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

