सरस्वती नदी के संरक्षण और विकास को आईआईटी रुडक़ी से बनेगी रिपोर्ट
- सरस्वती बहेगी, पर्यटन बढ़ेगा, भूजल भी सुधरेगा
- मुख्यमंत्री ने हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की बैठक ली
चंडीगढ़, 05 अगस्त (हि.स.)। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरस्वती नदी न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह हमारी प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति की जीवंत गवाह भी है। इसके पुनर्जीवन परियोजना को राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी बुधवार को सचिवालय में हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने बोर्ड की उपलब्धियों एवं लेखाजोखा संबंधित रिपोर्ट का विमोचन भी किया। इस दौरान सरस्वती नदी के समग्र विकास, संरक्षण एवं जनजागरूकता से जुड़े अहम मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया तथा कई अहम फैसले लिए गए। बैठक के दौरान हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के अधिकारियों ने आगामी योजनाओं तथा अब तक की गतिविधियों का ब्यौरा भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। बैठक में मुख्यमंत्री ने पिहोवा क्षेत्र के तमाम धार्मिक स्थलों की साफ सफाई की व्यवस्था को दुरुस्त रखने के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस दौरान अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि आदिबद्री सहित समस्त संबंधित कार्यों को गति के साथ पूरा किया जाए। इस परियोजना से जहां एक ओर पेयजल एवं सिंचाई के स्रोत विकसित होंगे, वहीं दूसरी ओर पिहोवा क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि 350 एकड़ में सरस्वती सरोवर बनाया जा रहा है, इस मुख्य जलाशय से अब तक 10 लाख क्यूसेक मिट्टी की खुदाई का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जो इस परियोजना की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
मुख्यमंत्री ने बैराज निर्माण के संबंध में अब तक के कार्य की रिपोर्ट लेते हुए सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि बैराज के काम को बिना किसी देरी के तेजी से आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस परियोजना में तकनीकी खामियों या समय सीमा में ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अधिकारी स्वयं इसकी नियमित समीक्षा करें।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

