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गेस्ट टीचरों को नियमित नहीं करेगी हरियाणा सरकार

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चंडीगढ़, 02 नवंबर (हि.स.)। हरियाणा सरकार ने राज्य के करीब 12 हजार गेस्ट टीचरों को नियमित करने से इनकार कर दिया है। अतिथि अध्यापकों को नियमित नहीं करने के संबंध में स्पीकिंग आर्डर निकाल चुकी प्रदेश सरकार ने यह आदेश वापस लेने से साफ मना कर दिया है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर ने सोमवार को हुई बैठक में अतिथि अध्यापकों के प्रतिनिधिमंडल से स्पष्ट कह दिया है कि अतिथि अध्यापक नियमित होने की शर्तें पूरी नहीं करते। इसलिए उन्हें नियमित नहीं किया जा सकता। प्रदेश सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि इन अतिथि अध्यापकों की भर्ती हुड्डा सरकार में कुछ समय के लिए हुई थी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे नियमित होने के हकदार बन गए।

राज्य में करीब 12 हजार अतिथि अध्यापक हैं, जो नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। उनकी सेवाओं को 21 साल से ज्यादा का समय हो चुका है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में कानूनी लड़ाई लडऩे के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को तीन माह में उन पर निर्णय लेने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट के आदेश में यह स्पष्ट रूप से इंगित नहीं था कि इन अतिथि अध्यापकों को अवश्य तौर पर नियमित किया जाए, लेकिन कानून व पालिसी के आधार पर फैसला लेने की बात जरूर कही गई थी। इस आदेश के आधार पर अतिथि अध्यापक लगातार राज्य सरकार पर पक्का करने का दबाव बना रहे थे।

तीन दिन पहले अतिथि अध्यापकों ने आंदोलन किया था, जिसके बाद हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने सीएम के मुख्य प्रधान सचिव से सोमवार को उनकी वार्ता कराने का भरोसा दिलाया था। नियत समय पर यह वार्ता हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

आंदोलनकारी अतिथियों का नेतृत्व कर रहे अतिथि अध्यापक संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष कृष्ण धारशूल, प्रवक्ता कुलदीप झरौली, महासचिव रघु वत्स, प्रदीप गुर्जर एवं महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष मैना यादव ने सोमवार को वार्ता में भागीदारी की। रघु वत्स के अनुसार बैठक में अधिकारियों ने उनके दस्तावेजों और नियुक्ति संबंधी तथ्यों पर कोई स्पष्ट चर्चा नहीं की।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा