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आईडीएफसी बैंक घोटाले में एचपीजीसीएल के पूर्व वित्त निदेशक बर्खास्त

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-सरकार अब तक चार अधिकारियों को कर चुकी हैं बर्खास्त

चंडीगढ़, 04 मई (हि.स.)। हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले के आरोप में हरियाणा पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के पूर्व वित्त निदेशक अमित दीवान को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। आरोप है कि दीवान ने उक्त बैंकों में खाते खोलने के दौरान 50 करोड़ के लेनदेन में कथित तौर पर 50 लाख रुपये की अवैध रिश्वत ली है।

दीवान को 'उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम कर्मचारी (दंड और अपील) विनियम, 2018' के नियम 7 (ए) से जुड़े प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए बर्खास्त कर दिया गया। हरियाणा के राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 23 फरवरी को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। घोटाले की जड़ें गहरी होने के कारण 8 अप्रैल को यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। इस घोटाले में बड़े पैमाने पर और कई स्तरों वाला वित्तीय धोखाधड़ी शामिल थी, जिसमें सरकारी प्रक्रियाओं में हेरफेर, फर्जी बैंकिंग गतिविधियां और काल्पनिक वित्तीय लेन-देन करके हरियाणा सरकार के फंड को आरोपी द्वारा नियंत्रित फर्जी संस्थाओं और खातों में ट्रांसफर किया गया था।

यह घोटाला 590 करोड़ रुपये का है, क्योंकि इसमें हरियाणा सरकार के कई विभागों के खाते शामिल हैं। दीवान चौथे ऐसे अधिकारी हैं जिन्हें बर्खास्त किया गया है। इससे पहले, 30 अप्रैल को, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के वित्त और लेखा नियंत्रक राजेश सांगवान को 10 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप में बर्खास्त किया गया था। उन पर आरोप था कि वे सह-आरोपी के लगातार संपर्क में थे और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खाता खुलवाने में उनकी कथित तौर पर अहम भूमिका थी।

23 अप्रैल को विकास और पंचायत विभाग के अधीक्षक नरेश कुमार को सह-आरोपी से कथित तौर पर 6.55 करोड़ रुपये और एक लग्जरी कार लेने, और कथित तौर पर मोहाली में अपनी पत्नी के नाम पर एक घर खरीदने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था। इसके अलावा, शिक्षा विभाग के मुख्य लेखा अधिकारी रणधीर सिंह को 24 अप्रैल को 54 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप में बर्खास्त किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने न केवल नकद के रूप में, बल्कि चंडीगढ़ से गोवा की यात्रा के लिए अपने और परिवार के पांच अन्य सदस्यों के लिए हवाई टिकट जैसी अन्य सुविधाओं के रूप में भी अवैध रिश्वत ली थी। इन चारों को बिना किसी विभागीय जांच के बर्खास्त कर दिया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा