भ्रष्टाचार के आरोपों में बागवानी विभाग के संयुक्त निदेशक समेत आठ पर एफआईआर
एसीबी ने 13 साल बाद जांच पर की कार्रवाई
चंडीगढ़, 07 अगस्त (हि.स.)। हरियाणा के बागवानी विभाग में करीब एक दशक पुराने फर्जीवाड़े के केस की जांच करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो ने विभाग के संयुक्त निदेशक समेत आठ कर्मचारियों के विरूद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत मामला दर्ज किया है। यह मामला उस समय का है जब वर्तमान संयुक्त निदेशक जिला बागवनी अधिकारी यमुनानगर के पद पर तैनात थे। एसीबी ने करीब 13 साल बाद इस मामले में कार्रवाई की है।
यमुनानगर के गांव रजहेड़ी में वर्ष 2006-07 के दौरान नारायण सिंह के परिवार ने 35 एकड़ में आम और सुदेश कुमारी ने 5 एकड़ में चीकू का बाग लगाया था, लेकिन जांच टीम के निरीक्षण में खेतों में 100 प्रतिशत पौधे मृत पाए गए। इसी गांव के एक अन्य किसान के 1 एकड़ खेत में भी बाग का रिकॉर्ड तो मिला, पर मौके पर एक भी पौधा नहीं था।
इसके अलावा धांधली उजागर करते हुए किसानों ने आरोप लगाया कि गड्ढे खोदने के लिए तय 32 हजार रुपये की जगह उन्हें सिर्फ 15 हजार रुपये दिए गए। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि गड्ढे किसानों ने खुद खोदे थे, जबकि कागजों में पूरा भुगतान किसी ठेकेदार को होना दिखाया गया था।
गांव अलाहड़ में सुरेंद्र नाम के किसान के खेत के निरीक्षण के दौरान 3 कनाल जमीन में सिर्फ 13 आम के पौधे पाए गए, जबकि सरकारी फाइलों में पूरे 1 एकड़ क्षेत्र के लिए सहायता राशि जारी दिखाई गई थी। इसी तरह गांव खेड़ा के दो किसानों के खेतों में आम के पुराने बागों को दोबारा ठीक करने के लिए 15-15 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद दी गई थी।
मगर, मौके पर न तो जमीन का क्षेत्रफल पूरा मिला और न ही पौधों की संख्या सही पाई गई। जिले में कुल 110 हेक्टेयर में बागों को ठीक करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन नियमों का पालन न होने के कारण सरकारी खजाने को करीब 16.50 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
जैविक खेती योजना की जांच के दौरान गांव अलाहड़ में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया, जहां किसान रमेश कुमार के नाम पर सरकारी रिकॉर्ड में वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगी दिखाई गई थी, लेकिन मौके पर ऐसी कोई यूनिट मिली ही नहीं।
शिवालिक डेवलपमेंट स्कीम के तहत सब्जी, फूल, मसाले, प्लास्टिक कैरेट और मशरूम कंपोस्ट के लिए 8.30 लाख रुपए का बजट था। इसमें सब्जियों के बीज पर 1 लाख, फूलों पर 2 लाख, टमाटर-शिमला मिर्च पर 2.50 लाख, प्लास्टिक कैरेट पर 1.60 लाख और मशरूम कंपोस्ट पर 1.20 लाख रुपए खर्च किए जाने थे। जांच में आरोप है कि विभाग ने योजना के निर्देशों के विपरीत केवल सब्जियों और फूलों के बीज खरीदे। फूलों के बीज ऑफ सीजन में किसानों को दिए गए, जबकि 6.30 लाख रुपए के सब्जियों के बीज लाभार्थियों को दिए ही नहीं गए। ये बीज कार्यालय में पड़े-पड़े एक्सपायर हो गए।
मामले की मूल जांच 28 मार्च 2013 को दर्ज हुई थी। जांच पूरी होने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने अंतिम रिपोर्ट 18 जुलाई 2025 को मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार के चौकसी विभाग को भेजी। मंजूरी मिलने के बाद तत्कालीन डीएचओ एवं वर्तमान में संयुक्त निदेशक सुधीर यादव, एचओडी सोरन सिंह और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
इस केस में आरोपी बनाए गए वर्तमान में डा. सुधीर यादव फिलहाल बागवानी विभाग में संयुक्त निदेशक के पद पर हैं। वहीं एचडीओ सोरन सिंह अब रिटायर हो चुके हैं। मामले की जांच वर्ष 2013 में शुरू हुई, जिसमें कुल 26 आरोपों की पड़ताल की गई। यमुनानगर जिले से संबंधित 5 आरोप सिद्ध पाए गए। एंटी करप्शन ब्यूरो ने सरकार को जांच रिपोर्ट जुलाई 2025 में दे दी गई थी, जिसमें अब रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

