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पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा की मुश्किलें बढ़ीं, प्लॉट आवंटन मामले में चलेगा केस

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चंडीगढ़, 14 अप्रैल (हि.स.)। हरियाणा सरकार ने पंचकुला के औद्योगिक क्षेत्र में 14 औद्योगिक भूखंडों के आवंटन से जुड़े सीबीआई मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। यह आवंटन हुड्डा सरकार के दूसरे कार्यकाल के अंतिम वर्ष 2013 में किए गए थे। पंचकूला औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में ईडी की अभियोग शिकायत में हुड्डा को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में शामिल किया गया है। एजेंसी ने आरोप लगाया कि उन्होंने अवैध आवंटन की वास्तव में योजना बनाई और चयनित आवंटियों के हित में पात्रता मानदंडों में बदलाव किया। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि कई आवंटी हुड्डा के परिचित या उनके करीबी लोगों से जुड़े थे। ईडी ने कहा कि रेनू हुड्डा और नंदिता हुड्डा उनके पैतृक गांव सांघी की रहने वाली थी। कंवर प्रीत सिंह संधू उनके सहपाठी डीडी संधू के बेटे थे। मोना बेरी उनके ओएसडी बलदेव राज बेरी की बहू थी। डॉ. गणेश दत्त रतन उनके साथ टेनिस खेलते थे और प्रदीप कुमार उनके निजी सचिव सिंह राम के बेटे थे। एजेंसी ने दावा किया कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने औद्योगिक भूखंडों के विज्ञापित होने और सभी आवेदन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) कार्यालय में प्राप्त होने के बाद ही अंतिम मानदंडों को मंजूरी दी थी। उन्होंने 24 जनवरी, 2012 को मानदंडों को मंजूरी दी, जबकि आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 6 जनवरी, 2012 थी।ईडी के अनुसार, संशोधित मानदंडों से उन 14 आवंटियों को लाभ हुआ, जो आर्थिक रूप से कमजोर थे और जिनके पास बहुत कम या कोई अनुभव नहीं था, जबकि मौखिक परीक्षा में अंकों में वृद्धि ने साक्षात्कारकर्ताओं को पक्षपात करने के लिए पर्याप्त विवेकाधिकार प्रदान किया। एजेंसी ने बताया कि अधिकांश आवंटित व्यक्ति असफल आवेदकों की तुलना में कम योग्य थे। 14 भूखंडों के लिए 582 आवेदक थे। एजेंसी ने पाया कि 30.34 करोड़ रुपये के भूखंड 7.85 करोड़ रुपये में बेचे गए, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।एजेंसी ने बताया कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के तत्कालीन मुख्य प्रशासक डीपीएस नागल, जो इंटरव्यू कमेटी के अध्यक्ष थे और जिन्हें एक प्रमुख साजिशकर्ता के रूप में नामित किया गया था, ने कथित तौर पर अंक दिए थे, जबकि समिति के सदस्यों के हस्ताक्षर साक्षात्कार के छह महीने बाद अंकों वाली एजेंडा शीट पर प्राप्त किए गए थे।सीबीआई ने इस मामले की जांच के दौरान वर्ष 2016 में एफआईआर दर्ज की थी। फरवरी माह के दौरान हरियाणा सरकार से इस संबंध में अनुरोध किया था। हुड्डा के साथ-साथ, राज्य सरकार ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों, जिनमें पूर्व मुख्य वित्त नियंत्रक एससी कंसल और पूर्व उप अधीक्षक बीबी तनेजा शामिल हैं, के खिलाफ भी अभियोजन को मंजूरी दे दी है। मंजूरी मिलने के बाद सीबीआई हुड्डा, पूर्व सरकारी अधिकारियों और आवंटन पाने वालों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा