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स्वास्थ्य कर्मचारियों ने ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ खोला मोर्चा

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स्वास्थ्य कर्मचारियों ने ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ खोला मोर्चा


-काली पट्टी बांधकर होगा सांकेतिक विरोध

चंडीगढ़, 02 अगस्त (हि.स.)। स्वास्थ्य विभाग की नई ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में रविवार को सर्व कर्मचारी संघ कार्यालय रोहतक में स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कर्मचारी संगठनों की संयुक्त बैठक हुई। बैठक में हरियाणा नर्सिंग एसोसिएशन, फार्मेसी एसोसिएशन, रेडियोग्राफर एसोसिएशन और लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष शामिल हुए। एम.पी.एच.डब्ल्यू. संगठन की ओर से प्रदेश प्रतिनिधि ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता तालमेल समिति के जिला प्रधान सिरसा ने की। सभी संगठनों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर एक संयुक्त ज्ञापन तैयार किया जाएगा। यह ज्ञापन मंगलवार को मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री के ओएसडी सुधांशु गौतम, स्वास्थ्य मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य विभाग एवं महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाओं को सौंपा जाएगा। ज्ञापन सौंपने के बाद उसी दिन सभी स्वास्थ्य कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे और 2 से 3 घंटे का सांकेतिक कार्य बहिष्कार/हड़ताल करेंगे। अगर सरकार ने सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो सभी संगठन संयुक्त बैठक कर आगामी आंदोलन की रणनीति और चरणबद्ध कार्यक्रम घोषित करेंगे।

बैठक में ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी पर विस्तार से चर्चा की गई। कर्मचारियों से मिले सुझावों और आपत्तियों पर भी विचार-विमर्श हुआ। सभी संगठनों ने कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने और जरूरत पडऩे पर संयुक्त आंदोलन चलाने का संकल्प लिया। कर्मचारी नेताओं ने एकमत से कहा कि सरकार किसी भी पॉलिसी को बनाने में कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों को भी साथ ले, ताकि उनकी समस्याओं को भी पॉलिसी बनाने के दौरान ध्यान में रखा जाए।

पूर्व में भी नर्सिंग यूनियन की ओर से मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपे गए थे। हर कर्मचारी सरकारी योजनाओं, सरकारी कार्यों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए सरकार कर्मचारियों के हितों का ख्याल जरूर रखे। स्वास्थ्य विभाग में 20-20 साल से भी ज्यादा समय से कर्मचारी एक ही जिले में काम कर रहे हैं। पारिवारिक दृष्टि से वे वहीं पर सेटल हो चुके हैं। महिला कर्मचारियों को तो और भी परेशानी होगी अगर उन्हें उस समय में जिला से बाहर भेजा गया जब उनके बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इसलिए सरकार इनकी ओर भी ध्यान आकर्षित करे।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा