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हिसार : अब प्रदेश में अधिक किसानों तक पहुंच सकेंगे एचएयू की सरसों के बीज

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हिसार : अब प्रदेश में अधिक किसानों तक पहुंच सकेंगे एचएयू की सरसों के बीज


हकृवि की सरसों की दो उन्नत किस्मों के लिए निजी कंपनी से समझौता

आरएच 1975 और आरएचएच 2101 किस्मों के बीज अधिक किसानों तक पहुंचेंगे

उत्पादन और तेल की मात्रा के लिहाज से हैं उपयोगी

हिसार, 12 अक्टूबर (हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि) ने अपने वैज्ञानिकों

द्वारा विकसित सरसों की उन्नत किस्मों को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के लिए

निजी क्षेत्र की कंपनी साहिब सीड्स प्राइवेट लिमिटेड, घरौंडा, करनाल के साथ समझौता

ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत विश्वविद्यालय की सरसों की उन्नत किस्मों

आरएच 1975 और आरएचएच 2101 के बीज किसानों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जाएगा।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने बताया कि हकृवि के वैज्ञानिक

लगातार विभिन्न फसलों की उन्नत किस्में विकसित कर रहे हैं। इन किस्मों को किसानों तक

पहुंचाने के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ समझौते किए जा रहे हैं। उन्होंने

कहा कि किसानों को विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध करवाकर प्रदेश और देश के

कृषि उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने

में भी मदद मिलेगी।

कुलपति की मौजूदगी में हुआ समझौता

समझौता ज्ञापन पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज की उपस्थिति में

हस्ताक्षर किए गए। साहिब सीड्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से कंपनी के निदेशक सुभाष खुराना

तथा विश्वविद्यालय की ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने समझौते पर हस्ताक्षर

किए।

आरएच 1975 की उत्पादन क्षमता 15 क्विंटल प्रति एकड़ तक

अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि सरसों की आरएच 1975 किस्म की

औसत उपज 11 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ है, जबकि इसकी उत्पादन क्षमता 14 से 15 क्विंटल

प्रति एकड़ तक है। इस किस्म में तेल की मात्रा लगभग 39.5 प्रतिशत है। अधिक पैदावार

और तेल की अच्छी मात्रा के कारण यह किस्म किसानों के लिए उपयोगी है।

आरएचएच 2101 किस्म 142 दिन में होती है तैयार

डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि सरसों की आरएचएच 2101 किस्म लगभग 142 दिन में

पककर तैयार हो जाती है। इसकी औसत उपज 28 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। इस किस्म

में शाखाओं की संख्या अधिक होती है और प्रति फली दानों की संख्या भी ज्यादा होती है,

जिससे इसकी उत्पादन क्षमता बेहतर रहती है। इसके दाने मध्यम आकार के होते हैं और इनमें

लगभग 40 प्रतिशत तेल की मात्रा पाई जाती है।

इस अवसर पर ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा, मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. नरेश कौशिक,

कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रमेश गोयल, डॉ. एसके पाहुजा, डॉ. एसके तेहलान, मीडिया

सलाहकार डॉ. संदीप आर्य, डॉ. वीरेंद्र मोर, डॉ. रामअवतार, डॉ. योगेश जिंदल, डॉ. जितेंद्र

भाटिया, डॉ. अनुराग तथा कंपनी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर