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हरियाणा बजट: जैविक खेती पर पांच वर्षों तक 10 हजार प्रति एकड़ प्रति वर्ष मिलेगा अनुदान

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चंडीगढ़, 02 मार्च (हि.स.)। हरियाणा सरकार जैविक खेती करने वाले किसानों का बजट में विशेष ध्यान रखा गया है। इस खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग के स्वामित्व वाली लगभग 800 एकड़ भूमि केवल उन्हीं किसानों को पट्टे पर दी जाएगी जो कम से कम अगले 10 वर्षों तक उसमें प्राकृतिक या जैविक खेती करेंगे। इसी तरह से पंचायत के स्वामित्व वाली भूमि पर भी इसी खेती को बढ़ावा देने के लिए अगले वर्ष एक नीति बनाई जाएगी।

किसानों को जैविक खेती प्रमाणीकरण के लिए हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी को एक प्रमाणीकरण संस्था बनाया जाएगा। प्राकृतिक/जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए इन किसानों को अगले पांच वर्षों तक 10 हजार प्रति एकड़ प्रति वर्ष अनुदान देने का प्रस्ताव बजट में दिया गया है। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से 2000 एकड़ के एक क्लस्टर में यह खेती होगी। इसमें अगर किसानों को नुकसान भी हुआ तो हर पाई की भरपाई सरकार करेगी। स्मार्ट बागवानी तकनीकों के तहत एक हजार एकड़ को लाया जाएगा।

मेरी फसल मेरा ब्योरा से जुड़े किसानों को जैविक खाद पर 80 प्रतिशत सब्सिडी और पांच किलोग्राम तक के पैकेज विक्रेताओं को बिक्री संबंधी लाइसेंस से छूट मिलेगी। मोरनी ब्लाक को प्राकृतिक जैविक खेती ब्लाक के रूप में विकसित करने की योजना इस वित्त वर्ष में आएगी।

विभिन्न प्रदेशों में आधुनिक तकनीकों, उन्नत कृषि पद्धतियों व नए बाजारों से जुडऩे के अवसर जानने के लिए हरर जिले से कम से कम 100 किसानों को एक्सपोजर विजिट पर भेजा जाएगा।

प्राकृति या जैविक खेती करने वाले किसान अपनी उपज सीधे बेच सकें इसके लिए जैविक और प्राकृतिक फसलों के लिए अलग से मंडियों में जगह निर्धारित की जाएगी। इसकी शुरुआत पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, चरखी दादरी व नारनौल की मंडियों से होगी। इन मंडियों में ऐसी उपज और उत्पाद के लिए जगह निर्धारित होगी। मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत धान की खेती छोडऩे वाले किसानो को मिल रही अनुदान राशि पिछले वर्ष 8000 रुपये प्रति एकड़ थी, वर्ष 2026-27 में धान छोडक़र दालें, तिलहन, कपास, उगाने वाले किसानों को दो हजार रुपये प्रति एकड़ अतिरिक्त बोनस दिया जाएगा। देसी कपास की खेती के प्रोत्साहन राशि को तीन से बढ़ाकर चार हजार कर दिया गया है। वर्ष 2026-27 के लिए भिवानी, रोहतक, गुरुग्राम, व अन्न्य जिलों में अतिरिक्त एक लाख 40 हजार एकड़ भूमि को खेती लायक बनाया जाएगा। पिछले बजट में एक लाख एकड़ भूमि के निर्धारित लक्ष्य में से लगभग 92 हजार एकड़ भूमि सुधार का कार्य चल रहा है।अगले तीन वर्ष में आठ लाख नलकूपों की गुणवत्ता का आंकलन किया जाएगा। वर्ष 2026-27 में एक तिहाई ट्यूबवेल यानी 2.70 लाख ट्यूबवेलों के पानी का परीक्षण होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा