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गुरुकुल भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कारों के संरक्षण में महत्वपूर्ण : राष्ट्रपति मुर्मु

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गुरुकुल भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कारों के संरक्षण में महत्वपूर्ण : राष्ट्रपति मुर्मु


-राष्ट्रपति ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र के 114वें स्थापना वर्ष समारोह में की शिरकत

चंडीगढ़, 01 नवंबर (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि गुरुकुल जैसी संस्थाएं भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और संस्कारों को संरक्षित रखने के साथ-साथ भावी पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद जी के महान व्यक्तित्व, त्याग, तपस्या और राष्ट्रसेवा के प्रति उनके समर्पण को नमन किया तथा भारतीय संस्कृति एवं वैदिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार में गुरुकुल कुरुक्षेत्र के योगदान की सराहना की।

राष्ट्रपति रविवार को कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल कुरुक्षेत्र में आयोजित 114वें स्थापना वर्ष समारोह एवं स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान की शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित ‘बलिदान शताब्दी समारोह’ में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं।

इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष, आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रतिनिधियों सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कहा कि गुरुकुल के इस पवित्र प्रांगण में इतिहास की प्रेरणा, वर्तमान का गौरव और भविष्य का संकल्प तीनों एक साथ दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन हर हरियाणावासी के लिए विशेष है, क्योंकि प्रदेश अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे कर हीरक जयंती मना रहा है। इसी शुभ अवसर पर महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद् और समाज सुधारक स्वामी श्रद्धानंद जी का बलिदान शताब्दी वर्ष तथा गुरुकुल कुरुक्षेत्र का 114वां स्थापना समारोह मनाया जा रहा है। उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद जी को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए गुरुकुल परिवार को स्थापना दिवस और प्रदेशवासियों को हरियाणा दिवस एवं हीरक जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा