गुरुग्राम: जलभराव से निजात के समाधान के लिए पहुंची आईआईटी गांधीनगर की टीम
-आईआईटी गांधीनगर के प्रोफेसर्स ने सुभाष चौक व राजीव चौक का किया दौरा
-उच्च क्षमता वाले स्टोरेज टैंक और इंजेक्शन वेल बनाने की योजना पर होगा काम
गुरुग्राम, 26 अगस्त (हि.स.)। शहर में जलभराव की समस्या के प्रभावी एवं स्थायी समाधान की दिशा में कार्य तेज कर दिया गया है। इसी क्रम में बुधवार को आईआईटी गांधीनगर के प्रो. विवेक कपाडिय़ा एवं प्रो. उदित भाटिया ने एमसीजी एवं जीएमडीए अधिकारियों के साथ शहर के जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। एमसीजी अतिरिक्त निगमायुक्त यश जालुका, पार्षद कुलदीप यादव व जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता अमित गोदारा ने आईआईटी टीम को विस्तृत जानकारी दी।
टीम ने बुधवार को सुभाष चौक एवं राजीव चौक के आसपास के क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान जलभराव की स्थिति, पानी के संग्रहण एवं निकासी की संभावनाओं को देखते हुए स्थायी समाधान के लिए प्रस्तावित तकनीकी व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। जलभराव वाले स्थानों के आसपास उच्च क्षमता के अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक और इंजेक्शन वेल विकसित करने की योजना पर तेजी से कार्य शुरू किया गया है। योजना के तहत बारिश के दौरान आने वाले पानी को पहले स्टोरेज टैंक में एकत्रित करने और इंजेक्शन वेल के माध्यम से पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
48 से 80 लीटर प्रति सेकंड क्षमता के होंगे इंजेक्शन वेल
प्रस्तावित योजना के अनुसार जलभराव संभावित स्थानों पर 48 लीटर प्रति सेकंड से लेकर 80 लीटर प्रति सेकंड क्षमता वाले इंजेक्शन वेल स्थापित किए जाएंगे। इनका उद्देश्य कम से कम समय में अधिक से अधिक वर्षा जल को जमीन के भीतर पहुंचाना होगा। इसके साथ ही स्टोरेज टैंक में बारिश के पानी को तत्काल संग्रहित करने की व्यवस्था की जाएगी, जिससे जलभराव वाले स्थानों पर पानी जमा न हो सके और नागरिकों को परेशानी से राहत मिले। आईआईटी गांधीनगर के प्रोफेसर्स के साथ किए जा रहे इस कार्य का उद्देश्य गुरुग्राम की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकी एवं दीर्घकालिक जल प्रबंधन व्यवस्था विकसित करना है। जलभराव वाले क्षेत्रों के आधार पर स्टोरेज क्षमता और इंजेक्शन वेल की क्षमता तय करने पर काम किया जा रहा है।
स्काडा तकनीक से होगी स्मार्ट जल प्रबंधन व्यवस्था
गुरुग्राम में प्रस्तावित यह व्यवस्था स्काडा तकनीक आधारित होगी, जिसे सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड से लिंक किया जाएगा। इससे जलस्तर एवं जल प्रबंधन से संबंधित आंकड़ों की बेहतर निगरानी और तकनीकी विश्लेषण में मदद मिलेगी। एमसीजी एवं जीएमडीए का फोकस केवल बारिश के दौरान पानी निकालने तक सीमित न रहकर जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान विकसित करने पर है। स्टोरेज टैंक एवं उच्च क्षमता वाले इंजेक्शन वेल के माध्यम से वर्षा जल के प्रभावी प्रबंधन की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

