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चंडीगढ़: जीरो ड्राप आउट लक्ष्य लेकर गुरुजी घर-घर जाकर करेंगे बच्चों का नामांकन

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चंडीगढ़: जीरो ड्राप आउट लक्ष्य लेकर गुरुजी घर-घर जाकर करेंगे बच्चों का नामांकन


-20 अप्रैल तक चलेगा प्रवेश उत्सव, ग्राम पंचायतें बनेंगी सहभागी

चंडीगढ़, 30 मार्च (हि.स.)। शिक्षा विभाग ने जीरो ड्राप आउट का लक्ष्य निर्धारित किया है। बाल वाटिका से लेकर 12वीं कक्षा तक नामांकन का जिम्मा शिक्षकों को सौंपा गया है। ड्राप आउट बच्चों को स्कूल की दहलीज तक लाने में पंचायतें और स्कूल प्रबंधन समितियां सहभागी बनेंगे।

हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, जिला परियोजना समन्वयक के साथ स्कूल मुखियाओं और स्कूल प्रबंधन समिति पत्र लिखकर राज्य को जीरो ड्राप आउट बनाने तथा राजकीय विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के तहत प्रवेश उत्सव कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश जारी किए हैं। नई शिक्षा नीति-2020 के तहत वर्ष 2030 तक बाल वाटिका से लेकर 12वीं कक्षा तक 100 प्रतिशत नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके तहत 3 वर्ष से लेकर 18 वर्ष तक के सभी बच्चों का स्कूलों में नामांकन कराने पर जोर दिया गया है। वहीं उच्चतर शिक्षा में इस लक्ष्य को 34 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करना है।

प्रदेशभर में 23 मार्च को प्रवेश उत्सव अभियान की शुरुआत हो चुकी है, जोकि 20 अप्रैल तक चलेगा।

विभाग की ओर से स्पष्ट हिदायत दी गई है कि शिक्षकों को अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे बच्चों की पहचान करनी होगी, जो अभी तक स्कूल से बाहर हैं या ड्रॉपआउट की श्रेणी में आते हैं। ऐसे बच्चों के अभिभावकों से व्यक्तिगत संपर्क कर उन्हें शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा। प्रवेश उत्सव के दौरान स्कूलों में बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। गांवों और शहरों में नामांकन रैलियां निकालने के साथ पोस्टर, बैनर और प्रचार सामग्री के माध्यम से सुविधाओं का प्रचार किया जाएगा। वहीं ग्राम पंचायत, नगर पालिका और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा।

स्कूल तक सीमित नहीं रहेगा अभियान

प्रवेश उत्सव अभियान केवल स्कूल तक सीमित नहीं, रहेगा बल्कि शिक्षक और स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्य बच्चों के घर-घर जाकर उनका नामांकन करेंगे। विशेष रूप से उन परिवारों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जो अपने बच्चों की शिक्षा के प्रति उदासीन हैं या आर्थिक-सामाजिक कारणों से बच्चों को स्कूल नहीं भेज पा रहे हैं। ऐसे अभिभावकों को व्यक्तिगत रूप से समझाकर बच्चों को स्कूल से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

सरकारी स्कूलों में मिलने वाली गिनाई जाएंगी सुविधाएं

निदेशालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि प्रवेश उत्सव अभियान के तहत शिक्षक अभिभावकों को सरकारी स्कूलों में मिल रही सुविधाओं के बारे में अवगत कराएंगे। मुख्य रूप से बच्चों को मुफ्त पाठ्य पुस्तकें और स्टेशनरी, मध्याह्न भोजन, निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, मेधावी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, एसी/बीसी और बीपीएल वर्ग के छात्रों के लिए आर्थिक सहायता, साइकिल और परिवहन सुविधा, स्टीम लैब और डिजिटल शिक्षा, स्किल पास बुल के साथ खेल, योग और सह-पाठ्य गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली तमाम सुविधाओं का उल्लेख करेंगे।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी मुफ्त

परियोजना परिषद की ओर से स्पष्ट हिदायत दी गई है कि अभिभावकों को अवगत कराया जाए कि सरकारी स्कूलों में अब केवल सामान्य शिक्षा ही नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करवाई जा रही है। इनमें सुपर-100 कार्यक्रम के तहत नीट और आईआईटी-जेईई की मुफ्त कोचिंग, बुनियाद कार्यक्रम के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की पहल सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को नई पहचान दे रही है। इसके साथ ही हर महीने पीटीएम के माध्यम से बच्चों की प्रगति पर चर्चा करने बारे भी अवगत कराया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा