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गुरुग्राम: डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए पांच साल के बाद किसी एजेंसी को विस्तार नहीं

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गुरुग्राम: डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए पांच साल के बाद किसी एजेंसी को विस्तार नहीं


-नगर निगम गुरुग्राम में कचरा प्रबंधन एजेंसियों के पैनलमेंट कार्यशाला में लिया निर्णय

-शुरुआत में एजेंसियों का पैनलमेंट तीन साल की अवधि के लिए होगा

गुरुग्राम, 21 जनवरी (हि.स.)। नगर निगम गुरुग्राम क्षेत्र में डोर-टू-डोर संग्रहण करने के लिए चयनित एजेंसियों का पैनलमेंट प्रारंभिक रूप से तीन वर्षों के लिए किया जाएगा। संतोषजनक प्रदर्शन एवं शर्तों की पूर्ति पर इसे एक बार और दो वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकेगा। पांच वर्षों की अवधि के बाद किसी भी प्रकार का विस्तार नहीं दिया जाएगा। हालांकि एजेंसी फिर से आवेदन कर सकेगी। असंतोषजनक प्रदर्शन या प्रशासनिक कारणों से पैनलमेंट को किसी भी समय समाप्त किया जा सकता है। यह बात नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने बुधवार को नगर निगम में बल्क वेस्ट जनरेटर्स के लिए कचरा प्रबंधन एजेंसियों के पैनलमेंट को लेकर कार्यशाला एवं बैठक में कही।

निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि एजेंसियों के लिए एसडब्ल्यूएम रूल, 2016, नगर निगम के उप-विधानों तथा भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, सीपीसीबी/एसपीसीबी और सीपीएचईईओ द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य किया गया है। एजेंसी को 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर संग्रहण केवल अलग किए गए कचरे का ही करना होगा। यदि एजेंसी स्वयं कचरे का प्रसंस्करण नहीं कर पाती है, तो उसे अधिकृत रीसाइक्लर से समझौता करना होगा।

नगर निगम गुरुग्राम द्वारा बल्क वेस्ट जनरेटर्स (बीडब्ल्यूजी) से उत्पन्न होने वाले ठोस कचरे के वैज्ञानिक एवं प्रभावी प्रबंधन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यशाला एवं बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का उद्देश्य कचरा संग्रहण, पृथक्करण, परिवहन, प्रसंस्करण एवं निपटान के लिए एजेंसियों के पैनलमेंट से संबंधित नियमों, शर्तों एवं प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी साझा करना रहा। यह पहल शहर में ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक अहम कदम है।

बैठक में स्पष्ट किया गया कि कचरे का परिवहन कवर किए गए, अलग-अलग कंपार्टमेंट व रंग-कोडिंग वाले वाहनों से किया जाएगा, जो जीपीएस से लैस होंगे और एमसीजी/जीएमडीए प्रणाली से जुड़े रहेंगे। एजेंसियां अपने स्वयं के कंपोस्टिंग सेंटर, एमआरएफ या ठोस कचरा प्रसंस्करण इकाइयां भी विकसित कर सकती हैं, जिनमें वेटब्रिज, अग्नि सुरक्षा उपकरण एवं पर्यावरणीय मानकों का पालन अनिवार्य होगा। निगमायुक्त प्रदीप दहिया के अनुसार नगर निगम गुरुग्राम का यह प्रयास शहर में बल्क वेस्ट जनरेटर्स से उत्पन्न कचरे के वैज्ञानिक, पारदर्शी एवं पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन को सुनिश्चित कर स्वच्छ और हरित गुरुग्राम की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस मौके पर अतिरिक्त निगमायुक्त यश जालुका व रविन्द्र यादव, संयुक्त आयुक्त डॉ. प्रीतपाल सिंह व कचरा प्रबंधन करने वाली एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर