गुरुग्राम: एमएसएमई हाे रहा तबाह, प्राइवेट कंपनी को दिया बिजली लाइसेंस रद्द करो सरकार: अशोक बुवानीवाला
-बिजली निजीकरण के फैसले को वापस लेने के लिए सीएम को लिखा पत्र
गुरुग्राम, 23 अक्टूबर (हि.स.)। हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण के खिलाफ 40 हजार बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की हड़ताल से उद्योग-व्यापार चौपट होने लगा है। इसे लेकर हरियाणा प्रदेश कांग्रेस औद्योगिक प्रकोष्ठ के चेयरमैन अशोक बुवानीवाला ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर निजी कंपनी को दिया गया समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस तुरंत रद्द करने की मांग की है।
अशोक बुवानीवाला ने कहा कि सरकार के एक गलत फैसले ने पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को अंधेरे में धकेल दिया है। हड़ताल के कारण बिजली सप्लाई चरमराई हुई है। फैक्ट्रियों में मशीनें बंद हैं, प्रोडक्शन ठप है और व्यापारी ऑर्डर पूरा नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा खामियाजा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) भुगत रहे हैं। छोटे उद्यमी पहले ही महंगाई, पूंजी की कमी और बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा से जूझ रहे हैं, अब बिजली संकट ने उनकी कमर तोड़ दी है। बिजली न होने पर भी उन्हें मजदूरों की तनख्वाह, फैक्ट्री का किराया, बैंक लोन की ईएमआई और दूसरे खर्चे तो देने ही पड़ रहे हैं। इससे हजारों श्रमिकों की आजीविका पर भी संकट मंडरा रहा है।
अशोक बुवानीवाला ने कहा कि सरकार को हठधर्मिता छोडक़र कर्मचारियों से बात करनी चाहिए। टकराव से नहीं, संवाद और सहमति से ही समाधान निकलेगा। उन्होंने सरकार से दो मांगें हैं। पहली तो निजी कंपनी को दिया गया समानांतर वितरण लाइसेंस तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। दूसरी मांग हड़ताली कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से तुरंत वार्ता कर हड़ताल खत्म कराई जाए और बिजली सप्लाई सामान्य की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेश के औद्योगिक उत्पादन को करोड़ों रुपये का नुकसान होगा और हरियाणा से निवेश भी पलायन कर सकता है। सरकार को उद्योग, व्यापार, मजदूर और आम जनता के हित में तुरंत फैसला लेना चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

