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गुडग़ांव में तो पानी-सडक़ पूरी नहीं हो रही, नए शहर को कहां से देेंगें: राव इंद्रजीत सिंह

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गुडग़ांव में तो पानी-सडक़ पूरी नहीं हो रही, नए शहर को कहां से देेंगें: राव इंद्रजीत सिंह


-केंद्रीय मंत्री ने सरकार की नए शहर बसाने की योजना को लेकर उठाए सवाल

-बोले, अगर अकाउंटिबिलिटी नहीं होगी तो मैं डंडा उठाऊंगा

गुरुग्राम, 02 सितंबर (हि.स.)। केंद्रीय मंत्री और गुरुग्राम से सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने सरकार की नए शहर बसाने की योजना पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि गुडग़ांव में पानी, सडक़ पूरी नहीं हो रही, केएमपी पर चार नए शहर बसाएंगे तो उन्हें पानी कहां से देंगे। उन्होंने माना कि जलभराव और अव्यवस्था से विदेशों तक सरकार की बदनामी हो रही है। यह बात उन्होंने बुधवार को यहां अधिकारियों के साथ बैठक के बाद पत्रकार वार्ता में कही।

राव इंद्रजीत ने कहा कि शहर में जलभराव, भूजल स्तर में गिरावट और बिल्डरों द्वारा बंद किए गए नदी-नालों की समस्या गंभीर है। उन्होंने तीन बिंदुओं-वाटर हार्वेस्टिंग, वाटर स्टोरेज और नदी-नालों को साफ कर मूल स्वरूप में लाने पर अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम में जमीन से पानी निकालकर काम चलाया जा रहा है। आंकड़े देते हुए उन्होंने कहा कि 2004 में 145 प्रतिशत भूजल दोहन होता था, जो 2024 में बढक़र 212.77 प्रतिशत हो गया, जबकि राष्ट्रीय औसत 60 प्रतिशत है। साल 2000 में भूजल स्तर 18.8 मीटर था, जो 2025 में गिरकर 38.5 मीटर तक पहुंच गया है।अकाउंटिबिलिटी नहीं तो डंडा उठाऊंगाराव इंद्रजीत ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सिस्टम में अकाउंटिबिलिटी नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं मॉनिटरिंग करूंगा। अगर अकाउंटिबिलिटी नहीं होगी तो मैं डंडा उठाऊंगा। यह बीड़ा मैंने उठाया है और मैं ही इसे पूरा करूंगा। राव इंद्रजीत सिंह ने 2002 से 2012 के दौरान हुई तरक्की में बिल्डरों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम आज भी हरियाणा को 60 प्रतिशत से अधिक राजस्व देता है। कांग्रेस सरकार के समय जब प्रॉपर्टी के दाम बढ़े और लाइसेंस बंटे, तो जमीन लेने वाले सभी बाहर के लोग थे, एक भी हरियाणा का लैंड ओनर नहीं था।

बिल्डर जमीन इकट्ठा कर हरियाणा सरकार से लाइसेंस मांगता था। चंडीगढ़ में बैठे अधिकारियों ने यह नहीं देखा कि जमीन नदी-नाले की है या नहीं। नदी-नालों पर लाइसेंस कट गए। रास्ता रुका तो पानी कहां से निकलेगा। उन्होंने बताया कि 2004 से 2014 तक जितने लाइसेंस कटे, उन पर 2017-18 तक कॉलोनियां विकसित हुईं और इसी दौरान नदी-नाले बंद हो गए। कांग्रेस की गलत नीति का उन्होंने तब भी विरोध किया था। राव ने कहा कि सांसद के तौर पर वह अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। उन्होंने माना कि उनकी पार्टी भी जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पाई है, लेकिन अब इस समस्या को स्थायी रूप से खत्म किया जाएगा।समाधान के तौर पर उन्होंने बताया कि दौलताबाद, खेडक़ीमाजरा, चंदू, बुढ़ेड़ा, धनकोट जैसे जलभराव वाले क्षेत्रों में इंजेक्शन ट्यूबवेल लगाए जाएंगे, जिनकी क्षमता प्रति सेकंड 45 से 93 लीटर पानी को ट्रीट कर जमीन में भेजने की है। निगम और सरकार की खाली पड़ी जमीन पर वाटर बॉडी बनाकर अरावली से आने वाले पानी को वहां लाया जाएगा। गुरुग्राम में सैटेलाइट मैपिंग से पता लगाया जाएगा कि पहले कितने नदी-नाले थे और कितने बंद कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि नदी-नालों पर जो निर्माण हो चुके हैं, अस्पताल या अन्य संस्थान बन चुके हैं, उनको हटाना आसान नहीं। उनके नीचे से पानी निकालने की तरकीब निकाली जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर