गुरुग्राम: मेडिकल कालेजों में चार साल से नहीं हुई नियमित फैकल्टी भर्ती: डा. अमित व्यास
-डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन इंडिया की ओर से सीएम को भेजा गया ज्ञापन
गुरुग्राम, 23 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की भारी कमी को लेकर डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन इंडिया (डीएमए) ने सरकार को चेताया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने बुधवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, स्वास्थ्य मंत्री आरती राव और एनएमसी को ज्ञापन सौंपकर तुरंत नियमित भर्ती की मांग की है। यह ज्ञापन राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास, महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी, उपाध्यक्ष डॉ. भानु कुमार और महिला प्रकोष्ठ सचिव डॉ. प्रियांशु शर्मा की ओर से भेजा गया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि डीएमईआर/यूएचएस रोहतक के पिछले चार साल में नियमित फैकल्टी भर्ती नहीं हुई। वर्ष 2022 की भर्ती अक्टूबर 2023 में पूरी हुई, जिससे कई एमडी, एमएस विशेषज्ञ निजी क्षेत्र और दूसरे राज्यों में चले गए। हाल ही में 750 अनुबंध पदों पर भर्ती निकली, लेकिन कम वेतन और असुरक्षा के कारण केवल 70-80 पद ही भरने की उम्मीद है। डा. अमित व्यास ने कहा कि पीजीआईएमएस रोहतक, केसीजीएमसी करनाल, बीपीएस खानपुर, मेवात मेडिकल कालेज में 30-40 प्रतिशत पद खाली हैं। एसएबीवी मेडिकल कालेज छायसा (फरीदाबाद) में 70 प्रतिशत पद खाली हैं। भिवानी, कोरियावास (नारनौल) और कुटेल (करनाल) में स्थायी फैकल्टी लगभग शून्य है। डीएमए के अनुसार फैकल्टी संकट से एमबीबीएस और पीजी छात्रों की पढ़ाई, थीसिस-रिसर्च और क्लिनिकल ट्रेनिंग प्रभावित हो रही है।
सुपर-स्पेशियलिटी सेवाएं और जटिल मरीजों का इलाज भी प्रभावित हो रहा है। एनएमसी मानकों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है, जिससे भविष्य में एमबीबीएस/पीजी सीटें बढऩे की बजाय घटने का खतरा है। डीएमए की ओर से मांग की गई है कि सभी स्वीकृत पदों पर समयबद्ध नियमित भर्ती की जाए। समान कार्य के लिए समान वेतन लागू हो। नियमित भर्ती तक संविदा फैकल्टी को पीएफ, पेंशन, ग्रेच्युटी, बीमा, ईएल, मेडिकल लीव, मातृत्व/पितृत्व अवकाश और अकादमिक लीव सहित सभी लाभ मिलें। पारदर्शी पदोन्नति नीति और अकादमिक-प्रशासनिक कार्यों में समान अवसर दिए जाएं।
डॉ. अमित व्यास ने कहा कि मजबूत फैकल्टी ही मजबूत मेडिकल कॉलेज और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की नींव है। सरकार ने जल्द भर्ती और सेवा सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की तो हरियाणा की मेडिकल शिक्षा गंभीर संकट में चली जाएगी। अब और देरी स्वास्थ्य तंत्र के हित में नहीं है।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

