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गुरुग्राम: 24 घंटे उपचार करेंगें तो खुद भी बीमार होंगें डॉक्टर: डा. अमित व्यास

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गुरुग्राम: 24 घंटे उपचार करेंगें तो खुद भी बीमार होंगें डॉक्टर: डा. अमित व्यास


-डीएमए ने यह बात कहकर सरकार से 24 गुणा 7 ओपीडी के निर्णय का किया विरोध

गुरुग्राम, 22 अप्रैल (हि.स.)। अगर 24 घंटे सातों दिन डॉक्टर मरीजों का इलाज करेंगें तो वे खुद बीमार हो जाएंगे। सरकार की यह फैसला उचित नहीं है। यह मरीजों की सुरक्षा के लिए भी खतरनाक होगा। इसलिए इस फैसले को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए। यह मांग डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए इंडिया) ने बुधवार को पत्र भेजकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से की है।

24 घंटे सातों दिन ओपीडी का विरोध करते हुए डीएमए इंडिया की ओर से कहा गया है कि सरकारी अस्पतालों में 24 घंटे ओपीडी लागू करने का प्रस्ताव अव्यावहारिक और खतरनाक है। डीएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास और महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी ने कहा कि यह प्रस्ताव जमीनी हकीकतों से पूरी तरह से कटा हुआ है। पहले से ही संसाधनों की कमी, स्टाफ की भारी कमी और अत्यधिक मरीज भार से जूझ रहे सिस्टम पर यह फैसला और बोझ डालेगा। उन्होंनें कहा कि सेंट्रल रेजिडेंसी स्कीम 1992 के तहत 48 घंटे साप्ताहिक कार्य सीमा निर्धारित है, लेकिन रेजिडेंट डॉक्टर पहले ही 80-100 घंटे काम कर रहे हैं। ऐसे में 24 गुणा 7 ओपीडी लागू करना सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा से समझौता है। डीएमए ने स्पष्ट किया कि बिना बड़े स्तर पर भर्ती और तीन-शिफ्ट व्यवस्था के यह योजना लागू करना असंभव है। केवल ओपीडी समय बढ़ाने से भीड़ कम नहीं होगी, बल्कि अनावश्यक दबाव और बढ़ेगा। डीएमए ने एम्स रेजिडेंट्स की मांग का समर्थन करते हुए सरकार से कहा है कि पहले सिस्टम सुधारिए, फिर विस्तार की बात कीजिए। नींद की कमी, बढ़ता कार्यभार और कमजोर सुरक्षा व्यवस्था ये सभी मिलकर चिकित्सा त्रुटियों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. व्यास ने स्पष्ट कहा कि यदि जमीनी समस्याओं को नजरअंदाज कर इस तरह के फैसले थोपे गए तो इसका खामियाजा मरीजों और डॉक्टरों दोनों को भुगतना पड़ेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर