गुरुग्राम: देश का विभाजन मानवता के भीतर गहरे घाव छोडक़र गया: नायब सिंह सैनी
-विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस भारत के इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी
गुरुग्राम, 04 अगस्त (हि.स.)। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस ज्ञात-अज्ञात विभाजन पीडि़तों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करने का दिन है। यह दिन भारत के इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी को स्मरण करने और उससे सीख लेने का दिन है।
यह बात उन्होंने मंगलवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को प्रदेश स्तर पर मनाने के लिए भाजपा कार्यालय में प्रदेश स्तरीय बैठक में कही। बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अलावा प्रदेश अध्यक्ष डा. अर्चना गुप्ता, प्रदेश संगठन मंत्री फणीन्द्रनाथ सहित वरिष्ठ नेताओं ने 14 अगस्त को गुरुग्राम में होने वाले प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वर्ष 1947 में देश के विभाजन ने करोड़ों लोगों का जीवन एक ही रात में बदल दिया था। लाखों परिवार उजड़ गए, अनगिनत लोगों को अपना घर, जमीन-जायदाद और अपनों को छोडऩा पड़ा। यह दिन उस असहनीय पीड़ा, संघर्ष और बलिदान को याद करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को इतिहास के बारे में पता होना चाहिए। अगर हम इतिहास से प्रेरणा लेते हैं तो हमारा भविष्य सुरक्षित रहता है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आने वाली युवा पीढ़ी को देश के इतिहास की सही जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। यदि हम इतिहास से प्रेरणा लेते हैं तो हमारा भविष्य सुरक्षित रहता है, लेकिन यदि इतिहास को भुला दिया जाए तो वही भयावह परिस्थितियां दोबारा सामने खड़ी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढी को समझना और बताना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश आजादी का जश्न मना रहा था, उसी समय भारत का विभाजन हुआ। यह केवल सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि दिलों को चीर देने वाला दर्दनाक अध्याय था।
लाखों लोगों को अपने घर-बार छोडक़र विस्थापित होना पड़ा। जिन लोगों ने अपनी आंखों से वह मंजर देखा, वे आज बुजुर्ग हो चुके हैं। उस समय कई लोग छोटे बच्चे थे, जो अपनी मां की गोद में सफर कर रहे थे। उन पर क्या बीती होगी, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। नायब सिंह सैनी ने कहा कि विभाजन के समय माताएं अपने बच्चों से बिछड़ गईं, बच्चे भीड़ में खो गए, परिवार बिखर गए और लाखों लोग हिंसा की चपेट में आए। यह केवल जमीन का विभाजन नहीं था, बल्कि मानवता के भीतर गहरे घाव छोडऩे वाली त्रासदी थी। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि भागदौड़ की जिंदगी में जब इंसान को थोड़ा सुख मिलता है तो वह दुखों को भूल जाता है, हमें उन दुखों को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभाजन की त्रासदी को कौन नहीं जानता। जब ट्रेनें चलती थी तो उसमें मातम अधिक होता था। कई बार तो ट्रेन अपनी मंजिल तक पहुंचती ही नहीं थीं। वे अपने साथ दर्द का सन्नाटा छोड़ जाती थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के माध्यम से देश को ऐसा मंच दिया है, जहां उस इतिहास को निरंतर याद किया जा सके और नई पीढ़ी को उससे परिचित कराया जा सके। उन्होंने कहा कि देश का यह विभाजन केवल जमीन का विभाजन नहीं था। यह विभाजन मानवता के भीतर गहरे घाव छोडक़र गया है। लोगों ने विस्थापित होकर कष्टों के बीच अपना जीवन जीया है। विभाजन त्रासदी की इस आग ने रिश्तों को जला दिया। सदियों की सांझी विरासत को पलभर में बिखरने का काम किया।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

