गुरुग्राम: बीपीएल, ईडब्ल्यूएस परिवारों को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत
-26 फ्लैटों के अलॉटमेंट कैंसल करने के फैसले को किया रद्द
-बिना सुनवाई कैंसिल करना नेचुरल जस्टिस का उल्लंघन
गुरुग्राम, 09 जुलाई (हि.स.)। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा हाउसिंग बोर्ड द्वारा बीपीएल/ईडब्ल्यूएस हाउसिंग स्कीम के तहत 26 फ्लैटों के अलॉटमेंट कैंसिल करने के फैसले को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि बिना नोटिस और सुनवाई के अलॉटमेंट कैंसिल करना नेचुरल जस्टिस के सिद्धांतों का उल्लंघन है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं गुडग़ांव रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन फेडरेशन के संयोजक संदीप फोगाट ने गुुरुवार को बताया कि जस्टिस विकास बहल और जस्टिस सुभाष मेहला की बेंच ने यह अहम फैसला सुनाया।
हाउसिंग बोर्ड हरियाणा ने सितंबर 2018 में गुरुग्राम में 1,719 बीपीएल/ईडब्ल्यूएस फ्लैट बनाने की घोषणा की थी। इन फ्लैटों की कीमत 5.85 लाख रुपये प्रति फ्लैट रखी गई थी। 21 जनवरी 2019 को पंचकूला में लॉटरी हुई और सफल आवेदकों से 58,500 रुपये की पहली किस्त ली गई। सभी लाभार्थी हरियाणा के बीपीएल/ईडब्ल्यूएस परिवारों से थे। 28 जुलाई 2025 को सरकार ने आवेदन पत्रों में पते और मोबाइल नंबर में कथित विसंगतियों का हवाला देकर छह साल बाद पूरी स्कीम ही रद्द कर दी। बिना किसी को कारण बताओ नोटिस दिए या सुनवाई का मौका दिए अलॉटमेंट कैंसिल कर दिए गए।
हाई कोर्ट ने 26 रिट पिटीशन पर एक साथ सुनवाई करते हुए कहा कि जिन याचिकाकर्ताओं ने या तो फ्लैट पर कब्जा कर लिया था या उनके पास वैध अलॉटमेंट राइट्स थे, उनका अलॉटमेंट इस तरह कैंसिल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने जुलाई 2025 के सभी कैंसिलेशन ऑर्डर रद्द कर दिए। साथ ही साफ किया कि राज्य चाहे तो कानून के अनुसार नई कार्रवाई शुरू कर सकता है, लेकिन उसके लिए पहले नोटिस और सुनवाई जरूरी होगी।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं गुडग़ांव रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन फेडरेशन के संयोजक संदीप फोगाट ने आरोप लगाया कि सरकार इन फ्लैटों को ई-ऑक्शन के जरिए कमर्शियल रेट पर बेचना चाहती है। इससे बीपीएल परिवारों का घर का सपना टूट जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में गुरुग्राम पुलिस में कई शिकायतें दर्ज हैं, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस अधिकारियों और आरोपियों के बीच मिलीभगत के आरोप भी लगे हैं। इस फैसले से गुरुग्राम और पूरे हरियाणा के सेंकड़ों संदीप फोगाट परिवारों को तुरंत राहत मिलेगी। अब हाउसिंग बोर्ड अगर कोई कार्रवाई करना चाहता है तो उसे कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी। कोर्ट के इस आदेश को वेलफेयर हाउसिंग स्कीम में गरीबों के अधिकारों की सुरक्षा और मनमानी प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ एक बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

