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हिसार : गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय की शोधार्थी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि

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हिसार : गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय की शोधार्थी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि


उच्च प्रभाव वाले

13.8 इम्पेक्ट फैक्टर जर्नल में शोधपत्र प्रकाशित

हिसार, 28 फरवरी

(हि.स.)। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग की

शोधार्थी कनिका रानी का महत्वपूर्ण शोध पत्र मैटेरियल्स साइंस के क्षेत्र में क्यू1

कैटेगरी में 13.8 इम्पेक्ट फेक्टर के साथ विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय जर्नल ऑफ मैग्नीशियम

एंड एलॉयज में प्रकाशित हुआ है। यह शोध प्रो. नीतू अहलावत के मार्गदर्शन तथा प्रो.

आरएस कुंडू के सह-मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर प्रो.

नीतू अहलावत ने शनिवार काे सह-शोधार्थियों के साथ कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई से मिलकर विश्वस्तरीय

शोध के लिए जरूरी सुविधाएं, उपकरण व आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए उनका आभार व्यक्त

किया। कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने इस उपलब्धि पर प्रो. नीतू अहलावत व कनिका रानी

को बधाई दी तथा सभी सह-शोधार्थिओं का मनोबल बढ़ाया। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय

स्तर के प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशन इस बात का प्रमाण है कि हमारे शोधकर्ता वैश्विक

वैज्ञानिक मंच पर उत्कृष्टता के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। यह उपलब्धि न

केवल युवा वैज्ञानिकों को प्रेरित करेगी, बल्कि अनुसंधान के क्षेत्र में नई ऊर्जा और

विश्वास भी प्रदान करेगी।

कुलसचिव डॉ. विजय

कुमार ने भी कनिका रानी व सभी सह शोधार्थियों को बधाई देते हुए इस उपलब्धि की सराहना

की। इस अवसर पर कनिका रानी, आरती अहलावत, दीपक सैनी, अचला व पूजा उपस्थित रहे।

प्रो. नीतू अहलावत

ने बताया कि कनिका रानी भौतिकी विभाग में 13.8 इम्पेक्ट फेक्टर के साथ एससीआई जर्नल

में शोधपत्र प्रकाशित करने वाली पहली शोधार्थी है और यह उपलब्धि न केवल भौतिकी विभाग

बल्कि पूरे संस्थान के लिए सम्मान का क्षण है। उन्होंने बताया कि इस अत्याधुनिक शोध

में कैल्शियम कॉपर टाइटेनेट (सीसीटीओ) सिरेमिक में ऑक्सीजन रिक्तियों को नियंत्रित

कर उसकी सूक्ष्म संरचना, विद्युत चालन तंत्र तथा डाइइलेक्ट्रिक गुणों पर उनके प्रभाव

का गहन और वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है। सीसीटीओ अपनी अत्याधिक उच्च डाइइलेक्ट्रिक

स्थिरांक के कारण वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। शोध

में यह सिद्ध किया गया कि वाय3$ और एमजी2$ आयनों के समुचित संशोधन द्वारा ऑक्सीजन रिक्तियों

को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे मैटेरियल की ग्रेन संरचना, दोष

रसायन और चार्ज ट्रांसपोर्ट व्यवहार में उल्लेखनीय सुधार संभव हुआ। इसके परिणामस्वरूप

डाइइलेक्ट्रिक लॉस में कमी और विद्युत प्रदर्शन में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई,

जो भविष्य की उच्च क्षमता वाली इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सीसीटीओ के प्रमुख संभावित अनुप्रयोगों में उच्च ऊर्जा घनत्व वाले उन्नत कैपेसिटर,

पावर इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण व मेमोरी डिवाइसेज शामिल हैं। माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और

ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में यह कार्य नई तकनीकी संभावनाओं के द्वार खोलता है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर