home page

नूंह जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बनाए 16 क्लस्टर समूह

 | 
नूंह जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बनाए 16 क्लस्टर समूह


नूंह, 06 नवंबर (हि.स.)। किसानों की आमदनी बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और कृषि को पर्यावरण अनुकूल बनाने के उद्देश्य से कृषि विभाग की ओर से जिले में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत परम्परागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत जिले में 16 क्लस्टर समूहों का गठन किया गया है। इन समूहों के माध्यम से किसानों को सामूहिक रूप से जैविक खेती अपनाने और अपने उत्पादों का प्रमाणीकरण करवाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

जिला कृषि उपनिदेशक अनिल कुमार ने शुक्रवार को बताया कि योजना के तहत प्रत्येक क्लस्टर समूह में 20 हेक्टेयर यानी करीब 50 एकड़ क्षेत्र शामिल किया गया है। इस प्रकार जिले में कुल 16 क्लस्टर समूह बनाए गए हैं। इनका मुख्य उद्देश्य जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों के उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है।

उन्होंने बताया कि क्लस्टर समूहों से जुड़े किसान पीजीएस-इंडिया (सहभागितापूर्ण गारंटी प्रणाली) पोर्टल पर अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद संबंधित समूह को जैविक प्रमाणीकरण प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इससे किसान अपने उत्पादों को प्रमाणित जैविक उत्पाद के रूप में बाजार में बेच सकेंगे। प्रमाण पत्र मिलने से उत्पादों की पहचान और विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

अनिल कुमार ने बताया कि जैविक खेती के साथ-साथ सरकार दलहन उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी विशेष प्रयास कर रही है। इसी उद्देश्य से 'आत्मनिर्भरता इन पल्सेज' योजना शुरू की गई है। योजना के तहत जिले के किसानों को चने के बीज मिनीकिट वितरित किए गए हैं, ताकि वे दलहन की खेती को अपनाएं और इसके उत्पादन में वृद्धि कर सकें।

उन्होंने कहा कि चना एक महत्वपूर्ण दलहनी फसल है, जो किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी सहायक है। चने की जड़ों में मौजूद राइजोबियम जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। इससे भूमि की उर्वरता में सुधार होता है और खेती की टिकाऊ पद्धतियों को बढ़ावा मिलता है।

जिला कृषि उपनिदेशक ने किसानों से अपील की कि वे कृषि विभाग की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं तथा जैविक खेती, फसल विविधीकरण और दलहन उत्पादन को अपनाएं। उन्होंने कहा कि किसानों की सामूहिक भागीदारी से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि जिले में टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल कृषि व्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मोहानिया