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फतेहाबाद में कमर्शियल जमीन को कृषि की बताकर की रजिस्ट्री, डीसी ने लगाई रजिस्ट्रियों पर रोक

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फतेहाबाद में कमर्शियल जमीन को कृषि की बताकर की रजिस्ट्री, डीसी ने लगाई रजिस्ट्रियों पर रोक


फतेहाबाद, 23 अप्रैल (हि.स.)।फतेहाबाद के तहसील कार्यालय में करोड़ों रुपये की कमर्शियल जमीन को कृषि भूमि दर्शाकर फर्जी तरीके से रजिस्ट्री करने का बड़ा मामला सामने आया है। इस खेल के जरिए सरकारी खजाने को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त डॉ. विवेक भारती ने कड़ा संज्ञान लिया है और संबंधित रजिस्ट्रियों पर रोक लगाते हुए जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, कार्रवाई की भनक लगते ही नायब तहसीलदार विकास कुमार छुट्टी पर चले गए हैं।

गुरूवार को मिली जानकारी के अनुसार शहर के मिनी बाईपास स्थित बीघड़ रोड पर एक अवैध कमर्शियल कॉलोनी की जमीन को वैध और कृषि योग्य बताकर बेहद कम कीमत पर रजिस्ट्री कर दी गई। नियमों के अनुसार, कमर्शियल श्रेणी की जमीन की रजिस्ट्री के लिए जिला नगर योजनाकार की एनओसी अनिवार्य होती है, जिसे इस मामले में पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। आरोप है कि नगर परिषद के कर्मचारियों और तहसील स्टाफ की मिलीभगत से जमीन की फर्जी प्रॉपर्टी आईडी तैयार की गई ताकि उसे कृषि भूमि के रूप में पेश किया जा सके।

जांच में 25 मार्च 2026 को दर्ज तीन रजिस्ट्रियों नंबर 7648, 7649 और 7650 में भारी अनियमितता मिली है। रजिस्ट्री 7648 और 7649 में विक्रेता प्रवीण कुमारी ने 222-222 वर्ग गज के दो प्लॉट रीना रानी और दीपा रानी को करीब 50 लाख रुपए में बेचे दिखाए, जबकि कलेक्टर रेट इससे कहीं अधिक था। इन मामलों में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस में भारी चोरी की गई। इसके अतिरिक्त रजिस्ट्री नंबर 7650 करीब 28 मरला जमीन रमेश रानी, सरोज मेहता और पूजा रानी के नाम 50 लाख रुपए से कम में दर्ज कर दी गई, जबकि वास्तविक कलेक्टर रेट ढाई करोड़ रुपए से अधिक बताया जा रहा है। इस एक रजिस्ट्री में ही करीब 9.5 लाख रुपए स्टांप शुल्क और 20 हजार रुपए रजिस्ट्रेशन फीस का नुकसान हुआ। कुल मिलाकर अब तक 12 लाख रुपये से अधिक के राजस्व घाटे का अनुमान लगाया जा रहा है।

अधिकारियों की चुप्पी और जांच का घेरा

डीसी डॉ. विवेक भारती खुद इस पूरे प्रकरण की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने नायब तहसीलदार विकास कुमार द्वारा हस्ताक्षरित विवादित रजिस्ट्रियों पर आगामी आदेशों तक रोक लगा दी है। फिलहाल राजस्व विभाग का कोई भी अधिकारी इस पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। दूसरी ओर, नायब तहसीलदार का मोबाइल नंबर बंद आ रहा है, जिससे संदेह गहरा गया है।

इस घोटाले ने नगर परिषद फतेहाबाद को भी संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहाँ आम नागरिक प्रॉपर्टी आईडी के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, वहीं भू-माफिया और दलाल मिलीभगत से फर्जी आईडी बनवाकर बड़े घोटालों को अंजाम दे रहे हैं। निवासियों ने मांग की है कि इस साल बनी सभी प्रॉपर्टी आईडी की उच्च स्तरीय जांच की जाए ताकि पर्दे के पीछे बैठे असली दोषियों को बेनकाब किया जा सके।

हिन्दुस्थान समाचार / अर्जुन जग्गा