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पीजीआई रोहतक में चार नई बीजीए मशीनें शुरू, गंभीर मरीजों को तुरंत मिलेगी जांच रिपोर्ट

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पीजीआई रोहतक में चार नई बीजीए मशीनें शुरू, गंभीर मरीजों को तुरंत मिलेगी जांच रिपोर्ट


ट्रॉमा आईसीयू, सीटीवीएस, नवजात और मॉड्यूलर आईसीयू में स्थापित हुईं मशीनें

आईसीयू के पास ही होगी जांच, रिपोर्ट के लिए नमूना लैब भेजने की जरूरत नहीं

रोहतक, 06 अगस्त (हि.स.)। पीजीआई में गंभीर मरीजों के उपचार को और तेज करने के लिए चार नई अत्याधुनिक ब्लड गैस एनालाइजर (बीजीए) मशीनें लगाई गई। ट्रॉमा आईसीयू, सीटीवीएस, नवजात शिशु विभाग और मॉड्यूलर आईसीयू में लगाई गईं सभी मशीनें काम करना शुरू कर चुकी हैं। अब इन विभागों में भर्ती गंभीर मरीजों की ब्लड गैस जांच आईसीयू के पास ही हो सकेगी और रिपोर्ट मिलने में लगने वाला समय कम होगा। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एच.के अग्रवाल ने बताया कि क्रिटिकल केयर में मरीज की स्थिति तेजी से बदलती है और ऐसे मामलों में जांच रिपोर्ट के लिए ज्यादा समय लगना उपचार में बाधा बन सकता है।

बीजीए मशीन से धमनी के रक्त की कुछ बूंदों से ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, एसिड-बेस संतुलन तथा सोडियम, पोटैशियम और कैल्शियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि श्वसन विफलता, हृदय और किडनी से संबंधित गंभीर मरीजों, ऑपरेशन के बाद वेंटिलेटर पर रखे मरीजों तथा नवजात शिशुओं के उपचार में बीजीए जांच महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर मरीज को दिए जाने वाले ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सपोर्ट में आवश्यक बदलाव कर सकते हैं।

पहले लैब भेजना पड़ता था नमूना

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि पहले गंभीर मरीजों के रक्त के नमूने जांच के लिए आपातकालीन विभाग के पास स्थित लैब में भेजे जाते थे। नमूना भेजने और रिपोर्ट आने में लगने वाला समय कई बार उपचार को प्रभावित कर सकता था। अब आईसीयू के पास मशीन उपलब्ध होने से जांच प्रक्रिया तेज होगी और डॉक्टरों को मरीज की स्थिति के अनुसार तत्काल निर्णय लेने में सुविधा मिलेगी।

एक मरीज पर रोजाना पांच हजार रुपये तक का खर्च

कुलसचिव डॉ. रूप सिंह ने बताया कि निजी अस्पतालों में एक बीजीए जांच की कीमत करीब आठ सौ से दो हजार रुपये तक होती है। आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीज की स्थिति के अनुसार दिन में तीन से चार बार तक यह जांच करानी पड़ सकती है। ऐसे में केवल बीजीए जांच पर ही एक मरीज का रोजाना खर्च करीब पांच हजार रुपये तक पहुंच सकता है।उन्होंने बताया कि पीजीआई में यह जांच नि:शुल्क होने से मरीजों के परिजनों को आर्थिक राहत मिलेगी। साथ ही जांच के लिए मरीज का नमूना दूसरे स्थान पर भेजने की आवश्यकता कम होने से समय की भी बचत होगी।

नई मशीनों का सीधा लाभ ट्रॉमा, सीटीवीएस, नियोनेटोलॉजी और मॉड्यूलर आईसीयू में भर्ती मरीजों को मिलेगा। सड़क दुर्घटना में घायल मरीज के फेफड़ों की कार्यक्षमता और रक्त में ऑक्सीजन की स्थिति का तत्काल आकलन किया जा सकेगा। सीटीवीएस में बाईपास सर्जरी के बाद मरीज की निगरानी में मदद मिलेगी। वहीं, समय से पहले जन्मे नवजात शिशुओं में ऑक्सीजन की आवश्यकता का आकलन भी तेजी से किया जा सकेगा। मॉड्यूलर आईसीयू में मल्टी-ऑर्गन फेल्योर जैसे गंभीर मामलों में बीजीए रिपोर्ट के आधार पर मरीज को आवश्यक वेंटिलेटर और अन्य उपचार संबंधी सहायता देने में सुविधा होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल