अग्निकांड में मारे गए दमकल कर्मियों के लिए तेज होगी न्याय की लड़ाई
-सोमवार से प्रदेश में आंदोलन तेज करने का निर्णय
चंडीगढ़, 19 अप्रैल (हि.स.)। हरियाणा में गेहूं कटाई के सीजन में फायर ब्रिगेड कर्मचारियों की हड़ताल के चलते स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। प्रदेश के कई जिलों में आपात स्थिति को देखते हुए राज्य परिवहन की बसों के चालकों के फायर ब्रिगेड की गाडिय़ों के स्टेयरिंग थमाने का प्रयास किया गया है।
फरीदाबाद में एक कंपनी में आग बुझाते हुए मारे गए दो कर्मचारियों के परिजनों को राहत राशि प्रदान करने समेत करीब आधा दर्जन मांगों के लिए दमकल कर्मचारी लंबे समय से हड़ताल पर हैं। अग्निशमन विभाग और सरकार के स्तर पर आंदोलनरत कर्मचारियों के साथ तीन दौर की वार्ता हो चुकी है, मगर अभी तक किसी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। सोमवार से इन कर्मचारियों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। अब चूंकि गर्मी का मौसम जोर पकड़ गया है और खेतों में फसल कट रही है तो ऐसे में आग की घटनाएं होने की स्थिति में दमकल कर्मियों के हड़ताल पर होने से समस्या बढ़ सकती है।
16 फरवरी को फरीदाबाद के गांव मुजेसर स्थित एक स्टील कंपनी में लगी आग बुझाते समय दो दमकल कर्मचारियों भवीचंद शर्मा व रणवीर सिंह की दर्दनाक मौत हो गई थी। इन दोनों दमकल कर्मचारियों को न्याय दिलाने तथा विभागीय समस्याओं के समाधान को लेकर नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा एवं हरियाणा अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन के आह्वान पर आठ अप्रैल से प्रदेशभर में दमकल कर्मियों की हड़ताल चल रही है। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा और सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री व महासचिव कृष्ण कुमार नैन ने भी हड़ताल और कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया है। उन्होंने दमकल कर्मचारियों की मांगों का शीघ्र समाधान नहीं होने की स्थिति में आंदोलन के तेज करने की चेतावनी दी है।
हरियाणा अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन के राज्य प्रधान राजेंद्र सिंद ने कहा कि जब तक अग्निकांड में अकाल मृत्यु का शिकार हुए भवीचंद शर्मा व रणबीर सिंह को शहीद का दर्जा नहीं मिलता, मृतकों के आश्रितों को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक-एक सदस्य को सरकारी पक्की नौकरी नहीं मिलती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
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फायर ब्रिगेड कर्मियों की मुख्य मांगे
- फरीदाबाद के दिवंगत दोनों दमकल कर्मचारियों को शहीद का दर्जा दिया जाए।
-मृतकों के आश्रितों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
-परिवार के एक-एक सदस्य को पक्की सरकारी नौकरी मिले।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं के पीडि़तों के लिए स्थायी नीति बनाई जाए।
- नियमित कर्मचारियों के लिए लागू आनलाइन ट्रांसफर पालिसी में राहत प्रदान की जाए।
-कच्चे कर्मचारियों को वन टाइम पालिसी बनाकर गृह जिले प्रदान किए जाएं।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

