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फरीदाबाद : स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही, अस्पताल में पानी की टंकियों से ढक्कन गायब

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फरीदाबाद : स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही, अस्पताल में पानी की टंकियों से ढक्कन गायब


फरीदाबाद, 08 अप्रैल (हि.स.)। फरीदाबाद जिले के सिविल अस्पताल की पानी की कई टंकियों से ढक्कन गायब होने से एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आई है। सिविल अस्पताल की छत पर रखी पानी की टंकियों की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई है। टंकियों की वर्तमान हालत को देखकर साफ-सफाई और रखरखाव के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार, सिविल अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग की छत पर 10 से 12 पानी की टंकियां लगी हुई हैं। इनमें से लगभग 4 से 5 टंकियां बिना ढक्कन के खुली मिलीं, जिससे उनमें गंदगी, धूल और अन्य कचरा गिरने की पूरी आशंका बनी रहती है। इसके अलावा, निरीक्षण के दौरान एक टंकी का पानी छत पर फैला हुआ भी दिखाई दिया, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि टंकी से पानी ओवरफ्लो हो रहा था या फिर उसमें किसी प्रकार की तकनीकी खराबी थी। जानकारी के मुताबिक, इन टंकियों की लंबे समय से ठीक तरह से सफाई नहीं करवाई गई है। खुले ढक्कनों के कारण टंकियों के अंदर धूल, पत्ते, काई और अन्य गंदगी जमा होने की संभावना है, जो स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक हो सकता है। यही पानी अस्पताल की बिल्डिंग में अलग-अलग कार्यों के लिए सप्लाई किया जाता है। जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना है। इस मामले को लेकर फरीदाबाद के सिविल सर्जन डॉक्टर जयंत आहूजा ने बताया कि 2 अप्रैल को हरियाणा सरकार के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी की ओर से सभी स्वास्थ्य संस्थानों की बिल्डिंगों पर लगी पानी की टंकियों की साफ-सफाई कराने के आदेश जारी किए गए थे। उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर विभाग की ओर से हर तीन महीने में पानी की टंकियों की सफाई करवाई जाती है। हालांकि, मौजूदा स्थिति को देखते हुए एहतियात के तौर पर अब दोबारा सभी स्वास्थ्य संस्थानों में लगी टंकियों की सफाई के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह के अंदर सभी टंकियों की सफाई करवा दी जाएगी, जिन टंकियों के ढक्कन नहीं हैं वहां नए ढक्कन लगवाए जाएंगे और जमी हुई काई को केमिकल के माध्यम से साफ किया जाएगा। सिविल सर्जन ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल में आने वाले मरीजों के पीने के लिए आरओ सिस्टम लगाया गया है, जिससे उन्हें स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जाता है और टंकियों का पानी सीधे तौर पर मरीजों के पीने के लिए इस्तेमाल नहीं होता।

हिन्दुस्थान समाचार / -मनोज तोमर