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नूंह: तीन साल से जलभराव की मार झेल रहे निजामपुर-मरोड़ा-मालब के किसान

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नूंह: तीन साल से जलभराव की मार झेल रहे निजामपुर-मरोड़ा-मालब के किसान


नूंह, 03 अक्टूबर (हि.स.)। नूंह खंड के गांव निजामपुर, मरोड़ा और मालब के किसान पिछले करीब तीन वर्षों से खेतों में जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। सेंकड़ों एकड़ कृषि भूमि में लंबे समय से पानी जमा होने के कारण किसानों की फसलें लगातार प्रभावित हो रही हैं। अब सरसों की बिजाई और गेहूं की बुवाई का समय नजदीक आने के साथ ही किसानों की चिंता और बढ़ गई है। खेतों से पानी नहीं निकलने के कारण आगामी फसल सीजन भी प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

किसानों ने शनिवार काे बताया कि जलभराव की समस्या को लेकर वे लगातार संबंधित अधिकारियों के समक्ष गुहार लगा रहे हैं। उनकी मांग है कि खेतों से पानी निकालने के लिए पर्याप्त संख्या में मोटर-पंप लगाए जाएं, ताकि जलभराव वाले क्षेत्रों को जल्द से जल्द खाली कराया जा सके। किसानों के अनुसार, कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद अभी तक जमीनी स्तर पर समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। मोहम्मद इकबाल, शमशेर, पूर्व सरपंच शरीफ, पूर्व सरपंच साबिर हुसैन मालब, सैय्यद, अब्बास अली, समाजसेवी अबरार हुसैन मालब, वाजिद हुसैन, ब्लॉक समिति सदस्य सौकत हुसैन सहित अन्य किसानों का कहना है कि पिछले करीब तीन वर्षों से जलभराव के कारण उन्हें लगातार फसल नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके बावजूद तीन साल के फसल नुकसान का मुआवजा भी अभी तक नहीं मिला है। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है और खेती करना मुश्किल होता जा रहा है।

किसानों के मुताबिक, जलभराव का मुद्दा विधायक चौधरी आफताब अहमद के समक्ष भी कई बार उठाया जा चुका है। अधिकारियों के साथ हुई बैठकों में भी समस्या को रखा गया, लेकिन इसके बावजूद खेतों से पानी निकालने की ठोस व्यवस्था नहीं हो सकी है। किसानों का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से केवल आश्वासन ही मिल रहा है, जबकि समस्या जस की तस बनी हुई है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जलभराव वाले खेतों से तत्काल पानी निकलवाने के लिए पर्याप्त मोटर-पंप लगाए जाएं। साथ ही जलभराव की समस्या से स्थायी निजात दिलाने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए और पिछले तीन वर्षों में हुए फसल नुकसान का उचित मुआवजा जल्द जारी किया जाए। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते खेतों से पानी नहीं निकाला गया तो सरसों और गेहूं की आगामी फसल की बुवाई प्रभावित हो सकती है।

हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मोहानिया