हिसार : सरकार व निजी बीमा कंपनियां कमा रही भारी मुनाफा, संकट में किसान : संपत
निजी बीमा कंपनियों की ‘मुनाफाखोरी’ पर केन्द्र व प्रदेश
सरकार को घेरा
हिसार, 15 मार्च (हि.स.)। इनेलो के राष्ट्रीय
संरक्षक एवं पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीयो)
के क्रियान्वयन की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार और निजी बीमा कंपनियाँ तो भारी
मुनाफा कमा रही हैं, जबकि किसान को फसल नुकसान का भारी संकट भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने
कहा कि किसान को जब भी थोड़ा बहुत मिलता है तो भुगतान में किसान को भारी संघर्ष करना
पड़ता है।
संपत सिंह रविवार को नलवा विधानसभा क्षेत्र के
लुदास, शाहपुर, न्योली कलां, मात्रश्याम, किरतान, हिंदवान, रावलवास खुर्द, रावलवास
कलां व धीरणवास गांवों में आयोजित जनसभाओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हरियाणा
में वर्ष 2023 से 2025 के बीच बीमा कंपनियों ने कुल 2,827.02 करोड़ रुपये प्राप्त किए
लेकिन पीड़ित किसानों को केवल 731 करोड़ रुपये के दावे का भुगतान किया गया। निजी बीमा
कंपनियों ने किसान और सरकार से मिलने वाली बीमा राशियों में लूट मचा रखी है। उन्होंने
इस लूट को उजागर करते हुए कहा कि केवल वित्त वर्ष 2025 में ही बीमा कंपनियों ने
1,003.68 करोड़ रुपये का प्रीमियम इकट्ठा किया, जबकि दावों के रूप में केवल 95 करोड़
रुपये का भुगतान किया गया, जिससे 908.68 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ।
उन्होंने केन्द्रीय
कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़े बताते हुए कहा कि पिछले तीन सालों में निजी
बीमा कंपनियों ने 2096 करोड़ रूप्ये का लाभ प्राप्त किया है। प्रो. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति
और भी चिंताजनक है। वर्ष 2023 से 2025 के बीच पूरे भारत में बीमा कंपनियों ने
82,015.52 करोड़ रुपये का प्रीमियम इकट्ठा किया, लेकिन किसानों को दावों के रूप में
केवल 34,799 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जिससे 47 हजार 216.52 करोड़ रुपये का निजी
बीमा कंपनियों ने लाभ कमाया। प्रो. सिंह ने कहा यह बेहद चिंताजनक है कि किसानों की
सुरक्षा के लिए बनाई गई योजना निजी कंपनियों के लिए सोने की खान बन गई है। प्रीमियम
राशि में किसानों की मेहनत की कमाई के साथ-साथ राज्य और केंद्र सरकार की भारी सब्सिडी
भी शामिल होती है। इसके बावजूद किसानों को अपने नुकसान का उचित मुआवजा नहीं मिलता।
प्रो. संपत सिंह ने मांग की कि सरकार फसल बीमा
कार्यक्रम से निजी बीमा कंपनियों को हटाए और इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी केवल सरकारी
स्वामित्व वाली बीमा कंपनियों को सौंपी जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि सरकारी
बीमा कंपनियों को इस योजना से कोई अधिशेष प्राप्त होता है तो उसे पारदर्शी तरीके से
किसानों को वापस दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन और किसानों की मेहनत
का इस्तेमाल कॉरपोरेट कंपनियों के लाभांश के लिए नहीं होना चाहिए। किसानों के पैसे
से होने वाला मुनाफा उन्हीं को वापस मिलना चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

