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हिसार : राखी गढ़ी में हड़प्पा कालीन सभ्यता काे जानने के लिए बाहरी क्षेत्र में भी होगी खुदाई

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हिसार : राखी गढ़ी में हड़प्पा कालीन सभ्यता काे जानने के लिए बाहरी क्षेत्र में भी होगी खुदाई


हिसार, 05 जून (हि.स.)। राखी गढ़ी में अबकी बार

हड़प्पा कालीन सभ्यता के टीलों का स्वरूप जानने के लिए खुदाई शुरू हुई है। टीलों के

कोनों पर ट्रेंच लगाकर खदाई की गई तो पता चला कि खुदाई के दौरान निकले स्ट्रक्चर का

स्वरूप बाहर की तरफ जा रहा है। अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग टीलों के बाहरी

क्षेत्र में भी खुदाई शुरू करेगा ताकि पता लगाया जा सके कि यह सभ्यता कितने क्षेत्र

में और फैली हुई है।

टीलों के साथ में ही किसानों ने काफी भूमि को

खेती में प्रयोग लाने के लिए समतल कर दिया था। जहां पर टीलें बने हुए थे उसी भूमि को

अधिग्रहण करके चारों तरफ फेंसिंग की गई है। अगर स्ट्रक्चर बाहर भी मिले तो इस सभ्यता

के इतिहास में एक और अध्याय जुड़ जाएगा।

राखीगढ़ी में हड़प्पा कालीन सभ्यता की साइट करीब

550 हेक्टेयर में फैली हुई है। सरकार की तरफ से इस भूमि को अधिग्रहण करके टीलों के

चारों तरफ फेंसिंग की हुई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्खनन शाखा दो ग्रेटर नोएडा

के अधीक्षण पुरातत्वविद मनोज सक्सेना नेतृत्व में पांचवे दौर की खुदाई 22 जनवरी से

शुरू हुई थी। खुदाई का मकसद था कि टीलों की किनारों पर ट्रेंच लगाकर खुदाई की जाए ताकि

हजारों साल पुरानी सभ्यता के स्वरूप को जाना जा सके। टीलें एक, दो, तीन, पांच और सात

पर खुदाई शुरू की गई तो हर किनारे को बारीकी से खोदा गया। खुदाई के दौरान निकले स्ट्रक्चर

टीलों के बाहर की तरफ भी जा रहे हैं। अब पुरातत्व विभाग के अधिकारी टीलों के बाहर की

तरफ भी खुदाई करने की योजना तैयार कर रहे हैं। अगर बाहर की तरफ खुदाई के दौरान स्ट्रक्चर

मिलते गए तो राखी गढ़ी में हड़प्पा कालीन सभ्यता के क्षेत्रफल को और बढ़ाया जा सकता

हैं। वैसे भी पूरी दुनिया में हड़प्पा कालीन सभ्यता की ये सबसे बड़ी साइट मानी जाती

है। जो टीलें अभी तक अधिग्रहण किए गए है उनकी लिमिट आगे जाएगी तो क्षेत्रफल बढ़ जाएगा।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्खनन शाखा द्वितीय

ग्रेटर नोएडा के अधीक्षण पुरातत्वविद मनोज सक्सेना ने शुक्रवार काे बताया कि खुदाई के दौरान स्ट्रक्चर

टीलों के बाहर जा रहे हैं। अब इस योजना पर काम किया जा रहा है कि बाहरी क्षेत्र के

खेतों में भी खुदाई की जाएगी ताकि उसे सभ्यता के सही स्वरूप को जाना जा सके। इसी मकसद

से अबकी टीलों के बाहरी कोनों पर खुदाई की गई थी।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर