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हिसार : गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय में स्वदेशी तकनीकी से बनेंगे ड्रोन, रक्षा व अन्य क्षेत्रों में मिलेगा राष्ट्र को लाभ

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हिसार : गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय में स्वदेशी तकनीकी से बनेंगे ड्रोन, रक्षा व अन्य क्षेत्रों में मिलेगा राष्ट्र को लाभ


विश्वविद्यालय ने स्थापित किया ‘ड्रोन टेक्नोलॉजी-सेंटर

ऑफ एक्सीलेंस’

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने दी ड्रोन तकनीक

बारे जानकारी

हिसार, 17 मार्च (हि.स.)। यहां के गुरु जम्भेश्वर

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अब ड्रोन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में राष्ट्र

के लिए अग्रणी योगदान देगा। विश्वविद्यालय पूर्णतया स्वदेशी तकनीक से ड्रोन विकसित

करेगा। गुजविप्रौवि का यह योगदान न केवल देश के रक्षा क्षेत्र में बल्कि कृषि, उद्योग,

चिकित्सा, यातायात, निगरानी और अन्य संबंधित क्षेत्रों में भी भारत की अभूतपूर्व सफलता

का आधार बनेगा। विश्वविद्यालय ने ‘ड्रोन टेक्नोलॉजी-सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित किया है। साथ

ही गुजविप्रौवि ने भारतीय सेना की दक्षिण पश्चिमी कमान तथा नाभास्त्र प्राइवेट लिमिटेड

(विशाखापत्तनम तथा करनाल) के साथ एमओयू भी साइन किए हैं।

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने मंगलवार काे बताया कि वर्तमान

में हम देख रहे हैं कि ड्रोन टेक्नोलॉजी ने रक्षा एवं निगरानी के क्षेत्र में क्रांतिकारी

बदलाव ला दिए हैं। वैश्विक स्तर पर ड्रोन टेक्नोलॉजी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

यह अत्यंत आवश्यक है कि विशेषकर रक्षा क्षेत्र में प्रयोग हो रहे ड्रोन ऐसी टेक्नोलॉजी

से बने होने चाहिए तो पूर्णतः स्वदेशी हों। विश्वविद्यालय में स्थापित हो रहा ड्रोन

टेक्नोलॉजी-सेंटर ऑफ एक्सीलेंस देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करने में सहायक होगा।

गुजविप्रौवि करेगा कुशल ड्रोन पायलट तैयार

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बताया कि विश्वविद्यालय

में स्थापित हो रहे ‘ड्रोन टेक्नोलॉजी-सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ तथा संबंधित विभागों

में आगामी शैक्षणिक सत्र से रोजगार उन्मुख नए पाठ्यक्रम भी आरंभ किए जाएंगे। विश्वविद्यालय

ड्रोन पायलट कोर्स आरंभ करेगा। इसके माध्यम से कुशल ड्रोन पायलट तैयार किए जाएंगे।

ये पायलट हर परिस्थिति में ड्रोन को उड़ाने तथा अपने टारगेट को साधने के लिए प्रशिक्षित

किए जाएंगे। विश्वविद्यालय में ड्रोन पायलट का कोर्स करने वाले युवा ‘ड्रोन पायलट’ का प्रमाण पत्र तथा

डीजीसीए से अनुमोदित लाइसेंस भी ले सकेंगे। विश्वविद्यालय के ड्रोन टेक्नोलॉजी से संबंधित

कोर्स युवाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार के नए द्वार खोलेंगे। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय

में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा एविएशन से संबंधित कोर्स पहले ही आरंभ किए जा चुके

हैं।

भारतीय सेना की दक्षिण पश्चिमी कमान के साथ मिलकर

करेंगे शोध

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बताया कि गुजविप्रौवि

का भारतीय सेना की दक्षिण पश्चिमी कमान (सप्त शक्ति) के साथ एमओयू इस दिशा में एक ऐतिहासिक

कदम है। इस एमओयू का उद्देश्य रक्षा तकनीक विशेषकर ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में मिलकर

शोध एवं विकास करना है। यह एमओयू भविष्य के युद्धों के लिए जरूरी नवाचारों को बढ़ावा

देने में सहायक होगी। इस एमओयू ये गुजविप्रौवि को रक्षा से संबंधित देश की जरूरतों

को समझने में भी मदद मिलेगी।

एमओयू हरियाणा सरकार की ड्रोन टेक्नोलाॅजी नीति

के अनुरूप

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बताया कि गुजविप्रौवि

ने नाभास्त्र प्राइवेट लिमिटेड (विशाखापत्तनम तथा करनाल) के साथ ड्रोन टेक्नोलाॅजी,

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एवं मशीन लर्निंग तथा एयरोस्पेस के क्षेत्र में शोध, प्रशिक्षण,

नवाचार और अन्य संबंधित सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए एक एमओयू किया है। यह एमओयू हरियाणा

सरकार की ड्रोन टेक्नोलाॅजी को बढ़ावा देने की नीति के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस समझौते के अंतर्गत विश्वविद्यालय परिसर में डीजीसीए दिशा-निर्देशों के अनुसार डी

जी सी ए अनुमोदित रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन (आरपीटीओ) भी स्थापित किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर