home page

राेहतक: पीएम के नशा मुक्त युवा अभियान की साझीदार बनी डीएलसी सुपवा

 | 

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा सुपवा परिवार, अभियान को सफल बनाने का लिया संकल्प

रोहतक, 02 अगस्त (हि.स.)। दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसी सुपवा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘नशा मुक्त युवा–विकसित भारत संकल्प अभियान’ की साझीदार बनी। रविवार को प्रधानमंत्री द्वारा देशव्यापी अभियान के शुभारंभ के दौरान डीएलसी सुपवा परिवार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़ा। प्रधानमंत्री के अभियान शुरू करने की घोषणा के साथ ही विश्वविद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और उपस्थितजनों ने नशे के खिलाफ अभियान को सफल बनाने में हरसंभव सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

प्रधानमंत्री से जुड़ने के लिए डीएलसी सुपवा में विशेष इंतजाम किए गए थे। फिल्म एवं टेलीविजन फैकल्टी स्थित मिनी ऑडिटोरियम की स्क्रीन को दिल्ली में आयोजित प्रधानमंत्री के मुख्य कार्यक्रम से जोड़ा गया। कार्यक्रम में कुलगुरु डॉ. अमित आर्य, रजिस्ट्रार डॉ. गुंजन मलिक मनोचा, सभी फैकल्टी के एफसी, फैकल्टी सदस्य, टीचिंग एवं नॉन-टीचिंग स्टाफ तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कुलगुरु डॉ. अमित आर्य ने कहा कि नशा किसी भी इंसान, समाज और राष्ट्र के लिए नासूर है। इससे बचाव और इसका त्याग बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में नशे को हमेशा बुराई के रूप में देखा गया है। हमारे संतों और गुरुओं ने भी समय-समय पर लोगों को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक किया है। डीएलसी सुपवा जिस धरती पर स्थित है, वहां आर्य समाज का भी व्यापक प्रभाव रहा है और नशे के खिलाफ लंबे समय से जागरूकता अभियान चलते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशभर में शुरू किया गया अभियान निश्चित रूप से नशे के खिलाफ जनजागरूकता को नई मजबूती देगा और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। नशे की लत लग जाने के बाद भी इससे छुटकारा पाया जा सकता है, इसके लिए मजबूत इच्छाशक्ति जरूरी है। समाज का सहयोग, योग और ध्यान व्यक्ति के अंतर्मन को मजबूती प्रदान करते हैं। यदि कोई व्यक्ति दृढ़ संकल्प कर ले तो नशे को अपने जीवन से पूरी तरह दूर किया जा सकता है। कुलगुरु ने कहा कि युवाओं और विद्यार्थियों को नशे से बचाना गुरुजनों की भी नैतिक जिम्मेदारी है। विद्यार्थी अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय घर-परिवार की अपेक्षा शिक्षकों और सहपाठियों के साथ अधिक बिताते हैं। ऐसे में गुरुजनों को आगे आकर विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर उनकी काउंसलिंग कर उन्हें नशे की गिरफ्त में जाने से रोका जा सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / अनिल