नौकरियों में दलितों व पिछड़ों के साथ भेदभाव कर रही सरकार
सहायक प्रोफेसर भर्ती मामले में हाईकोर्ट के फैसले ने साजिश को किया बेनकाब
गरीब युवाओं के साथ अन्याय बंद करे भाजपा सरकार
चंडीगढ़, 13 सितंबर (हि.स.)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सांसद रणदीप सुरजेवाला ने हरियाणा में सरकारी भर्तियों को लेकर सरकार को घेरा है। सहायक प्रोफेसर भर्ती से जुड़े मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की ओर से प्रदेश के दलित, पिछड़े, गरीब और वंचित वर्ग के युवाओं के साथ लगातार अन्याय और भेदभाव किया जा रहा है।
रणदीप सुरजेवाला ने रविवार को जारी बयान में कहा कि हाईकोर्ट के फैसले ने भर्ती प्रक्रिया में बीच में नए मानदंड जोडऩे के सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अदालत ने एचपीएससी को नए सिरे से परिणाम जारी करने के निर्देश दिए हैं, जिससे उन अभ्यर्थियों को राहत की उम्मीद जगी है, जो लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया पूरी होने और नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।
सुरजेवाला ने कहा कि आखिर एससी और बीसी वर्ग के होनहार बच्चों से सरकार को इतनी नफरत क्यों है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के गरीब और वंचित परिवारों के युवा वर्षों तक पढ़ाई करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, फीस और आवेदन पर पैसा खर्च करते हैं और नौकरी की उम्मीद में भर्ती प्रक्रिया में शामिल होते हैं, लेकिन सरकार की नीतियों और नियमों में बदलाव के कारण उन्हें बार-बार निराश होना पड़ता है।
सुरजेवाला ने कहा कि 2 अगस्त 2024 को एचपीएससी ने विभिन्न विषयों में सहायक प्रोफेसर के 2,424 पदों के लिए संयुक्त विज्ञापन जारी किया था। उनके अनुसार, बाद में भर्ती प्रक्रिया में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा से संबंधित नई शर्त जोड़ दी गई, जिसको लेकर अभ्यर्थियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद बीच में ऐसा नया मानदंड लागू करना उचित नहीं है, जिससे अभ्यर्थियों की पात्रता या चयन की स्थिति प्रभावित हो। सुरजेवाला ने कहा कि राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा पात्रता का आधार है, जबकि अंतिम चयन अभ्यर्थी की वास्तविक मेरिट और निर्धारित चयन प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।
सरकार की भर्ती नीति का सबसे बड़ा नुकसान प्रदेश के युवाओं को हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार बड़े-बड़े भर्ती विज्ञापन निकालती है, लाखों युवा आवेदन करते हैं, परीक्षा और चयन प्रक्रिया के लिए वर्षों इंतजार करते हैं, लेकिन अंतिम परिणाम में बड़ी संख्या में पद खाली रह जाते हैं।
सुरजेवाला ने कहा कि यह स्थिति तब है जब हरियाणा में बड़ी संख्या में शिक्षित युवा रोजगार की तलाश में हैं। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी के सहायक प्रोफेसर भर्ती में 613 पदों के लिए परीक्षा हुई, लेकिन 462 पद खाली रह गए। इसी प्रकार पीजीटी भर्ती में 1,711 पदों में से 1,672 पद खाली रहने का उन्होंने दावा किया। किसान, मजदूर, छोटे दुकानदार और गरीब परिवारों के बच्चे अपने घर की आर्थिक परिस्थितियों से लडक़र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियों के कारण इन युवाओं के सपने बार-बार टूट रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

