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डेंटल कालेजों में सरकारी डाक्टरों के लिए आरक्षित रहेंगी 40 प्रतिशत सीटें

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-25 प्रतिशत सीटें हरियाणा से बीडीएस करने वालों के लिए निर्धारित

-पाठ्यक्रम बीच में छोड़ा तो 10 लाख रुपये की बांड राशि देनी होगी

चंडीगढ़, 09 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा में मास्टर आफ डेंटल सर्जरी (एमडीएस) के नए शैक्षणिक सत्र में सरकारी व निजी डेंटल कालेजों और विश्वविद्यालयों में दाखिलों की प्रक्रिया तय कर दी गई है। सरकारी संस्थानों में आधी सीटें नीट एमडीएस-2026 की आल इंडिया मेरिट और शेष सीटें हरियाणा स्टेट मेरिट के आधार पर भरी जाएंगी।

राज्य कोटे की 40 प्रतिशत सीटें इन-सर्विस डाक्टरों और ईएसआइसी अस्पतालों, डिस्पेंसरी, अन्य संगठनों और स्वायत्त निकायों में कार्यरत चिकित्सकों के लिए आरक्षित रहेंगी। हरियाणा में स्थित संस्थानों से बीडीएस उत्तीर्ण करने वाले उम्मीदवारों के लिए 25 प्रतिशत सीटें निर्धारित की गई हैं। राज्य कोटे के तहत सभी सरकारी और निजी डेंटल संस्थानों तथा निजी विश्वविद्यालयों में यह व्यवस्था लागू होगी। दिव्यांगों के लिए पांच प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी। निजी डेंटल संस्थानों में 50 प्रतिशत सीटें ओपन मेरिट/स्टेट कोटा और शेष 50 प्रतिशत मैनेजमेंट कैटेगरी में होंगी। मैनेजमेंट कैटेगरी की मेरिट आल इंडिया मेरिट के आधार पर तैयार की जाएगी। सभी संस्थानों में दाखिले के लिए संयुक्त केंद्रीयकृत आनलाइन काउंसलिंग पंडित बीडी शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय रोहतक द्वारा कराई जाएगी।

पाठ्यक्रम बीच में छोडऩे वाले अभ्यर्थियों को 10 लाख रुपये की बांड राशि देनी होगी। साथ ही हरियाणा में किसी भी पीजी पाठ्यक्रम में तीन वर्ष तक आवेदन नहीं कर सकेंगे। जिस शैक्षणिक सत्र में पाठ्यक्रम छोड़ा जाएगा, उसकी फीस तथा अगले शैक्षणिक सत्र की फीस का 50 प्रतिशत भी देना होगा। यह प्रविधान मैनेजमेंट कैटेगरी पर भी लागू होगा।

काउंसलिंग में अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को 2500 रुपये तथा हरियाणा आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को 1250 रुपये पंजीकरण शुल्क देना होगा। निजी डेंटल संस्थानों को भी प्रत्येक स्वीकृत सीट के लिए विश्वविद्यालय में निर्धारित प्रोसेसिंग फीस जमा करनी होगी। एमडीएस की फीस सालाना आधार पर देय होगी। संस्थान अभ्यर्थियों से पूरे पाठ्यक्रम की फीस एक साथ एडवांस में नहीं ले सकेंगे। निजी कालेजों में प्रवेश के समय 50 प्रतिशत फीस जमा करने और शेष राशि अंतिम प्रवेश तिथि से पहले जमा करने का प्रविधान किया गया है। पीजी विद्यार्थियों को सरकारी कालेजों के पीजी विद्यार्थियों के समान स्टाइपेंड मिलेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा