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जींद : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय के डीन स्टूडेंट वेलफेयर को सौंपा ज्ञापन

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जींद : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय के डीन स्टूडेंट वेलफेयर को सौंपा ज्ञापन


जींद, 09 मार्च (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विद्यार्थियों की विभिन्न समस्याओं को लेकर विश्वविद्यालय के डीन स्टूडेंट वेलफेयर डा. जसवीर सुरा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से कमाओ और सीखो विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए योजना लागू करने, विश्वविद्यालय परिसर में पासपोर्ट बनाने की सुविधा उपलब्ध कराने तथा ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए विशेष शिविर आयोजित करने की मांग रखी गई।

एबीवीपी जींद विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष सतविंदर सोमवार को कहा कि आज के समय में बड़ी संख्या में विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं और अपनी पढ़ाई के साथ-साथ आर्थिक कठिनाइयों का सामना भी करते हैं। ऐसे में यदि विश्वविद्यालय में अर्न व्हाइल लर्न योजना शुरू की जाती है तो विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ आंशिक रोजगार का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में आर्थिक सहायता मिलेगी और वे आत्मनिर्भर भी बन सकेंगे। एबीवीपी का मानना है कि इस योजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों, पुस्तकालय, प्रशासनिक कार्यालयों तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में विद्यार्थियों को पार्ट टाइम कार्य दिया जा सकता है। जिससे उन्हें अनुभव भी प्राप्त होगा और आर्थिक सहयोग भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में पासपोर्ट बनवाने के लिए विशेष कैंप आयोजित किया जाए। आज के समय में अनेक विद्यार्थी उच्च शिक्षाए प्रतियोगी परीक्षाओं, विदेश में पढ़ाई तथा अन्य शैक्षणिक अवसरों के लिए पासपोर्ट बनवाना चाहते हैं लेकिन पासपोर्ट कार्यालय तक बार-बार जाने में समय और धन दोनों की समस्या आती है। यदि विश्वविद्यालय परिसर में ही पासपोर्ट सेवा शिविर लगाया जाए तो हजारों विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा और उनकी प्रक्रिया भी सरल हो जाएगी। एबीवीपी ने ज्ञापन में यह भी मांग रखी है कि विश्वविद्यालय प्रशासन, जिला प्रशासन और परिवहन विभाग के सहयोग से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए विशेष शिविर आयोजित करवाए। वर्तमान समय में बहुत से विद्यार्थी कॉलेज या विश्वविद्यालय आने-जाने के लिए दोपहिया या चारपहिया वाहन का उपयोग करते हैं लेकिन कई विद्यार्थियों के पास अभी तक वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है। यदि विश्वविद्यालय परिसर में ही ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है तो विद्यार्थियों को बार-बार आरटीओ कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और उनका समय भी बचेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा