home page

हिसार : विकलांगों ने धरना देकर वीबी ग्राम जी कानून रद्द करने की मांग उठाई

 | 
हिसार : विकलांगों ने धरना देकर वीबी ग्राम जी कानून रद्द करने की मांग उठाई


सरकार वीबी ग्राम जी कानून रद्द करें और मनरेगा

कानून बहाल करें : विकलांग मंच

वीबी ग्राम जी कानून में विकलांगों के अधिकार

सुरक्षित नहीं है : ऋषिकेश राजली

हिसार, 25 फरवरी (हि.स.)। विकलांग अधिकार मंच

हरियाणा की जिला कमेटी के बैनर तले लघु सचिवालय के समक्ष मनरेगा कानून को लेकर धरना-प्रदर्शन

कर अधिकारियों को ज्ञापन सोंपा गया। धरने की अध्यक्षता जिला प्रधान कृष्ण गुरी ने की

जबकि संचालन संदीप ने किया। विकलांग अधिकार मंच के राज्य महासचिव ऋषिकेश राजली ने विशेष

रूप से अपने विचार रखे।

विकलांग अधिकार मंच हरियाणा की जिला कमेटी ने

बुधवार काे प्रशासन की मार्फत मुख्यमंत्री के नाम पत्र जारी कर हरियाणा सरकार को अवगत करवाया कि

केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह वीबी ग्राम जी कानून लेकर आई है, जोकि गरीब जनता

व विकलांगों के लिए हितकारी नहीं है, इसमें अधिकार सुरक्षित नहीं है इसलिए इसे रद्द

करके मनरेगा को बहाल किया जाए। प्रेस बयान में ऋषिकेश राजली ने बताया कि वीबी ग्राम

जी में विकलांग लोगों के लिए-जो बहुत ज्यादा बेरोजगारी, जमीन की कमी और गरीबी का सामना

करते हैं-मनरेगा में ग्रामीण भारत में मजदूरी वाली नौकरी के बहुत कम तरीकों में से

एक रहा है। हालांकि, लगातार कम पैसे मिलने, काम न मिलने, डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम और

काम की जगहों पर ठीक से रहने की जगह न होने की वजह से पिछले कुछ सालों में इस सीमित

हिस्सेदारी में भी कमी आई है। इसलिए मनरेगा को रद्द करने से सीधे तौर पर ग्रामीण विकलांग

मजदूरों की रोजी-रोटी का और नुकसान होगा, जिससे वे और ज्यादा गरीबी में चले जाएंगे

और डिसेबिलिटी पेंशन पर निर्भर हो जाएंगे जो बहुत ही कम हैं। यह दावा कि वीबी ग्राम

जी में 125 दिन काम देगा, पूरी तरह से गुमराह करने वाला है, मौजूदा डिमांड पर आधारित

मनरेगा के तहत भी, जान-बूझकर पैसे की कमी की वजह से औसत रोजगार 50 दिनों से कम रहा

है।

ज्ञापन में कहा गया कि मनरेगा, अपनी सीमाओं के

बावजूद, विकलांग लोगों को कानूनी तौर पर मजदूर मानता है, जिन्हें रोजगार, काबिलियत

के हिसाब से काम और रोजी-रोटी की सुरक्षा का हक है। वीबी ग्राम जी इस अधिकार को कमजोर

करता है, बाहर रखने को सही ठहराता है और विकलांग ग्रामीण मजदूरों की रोजी-रोटी, इज्जत

और जिंदा रहने के लिए खतरा है। यह विकलांग लोगों के अधिकार एक्ट, 2016 का भी उल्लंघन

करता है, जो भेदभाव न करने, सही सुविधा और रोजी-रोटी की सुरक्षा को जरूरी बनाता है।

आज के धरने को ऋषिकेश राजली, कृष्ण गुरी, मीनू सिंगला, राजेश सलेमगढ़, संदीप मॉडल टाऊन,

नसीब राजली, बलराज, देवेंद्र लोरा आदि ने संबोधित किया।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर