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कैथल: पराली प्रबंधन से बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरा शक्ति, किसानों को कम लागत में मिलेगा अधिक उत्पादन

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कैथल: पराली प्रबंधन से बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरा शक्ति, किसानों को कम लागत में मिलेगा अधिक उत्पादन


कैथल, 05 नवंबर (हि.स.)। फसल अवशेष किसानों के लिए समस्या नहीं, बल्कि भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने का महत्वपूर्ण संसाधन हैं। पराली का खेत में ही उचित प्रबंधन करने से मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ती है और भूमि की गुणवत्ता में सुधार होता है। यह बात कृषि विज्ञान केंद्र कैथल के वैज्ञानिक एवं फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के नोडल अधिकारी डॉ. अमित कुमार ने कही। वे गुरुवार काे गांव सांच में आयोजित जिला स्तरीय फसल अवशेष प्रबंधन जागरूकता कार्यक्रम में किसानों को संबोधित कर रहे थे।

डॉ. अमित कुमार ने किसानों को संतुलित उर्वरकों के प्रयोग और उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी देते हुए कहा कि इनके इस्तेमाल से कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों को खेत में मिलाने से मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ता है, जिससे पोषक तत्वों की उपलब्धता बेहतर होती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है। उन्होंने आगामी गेहूं की फसल में खरपतवार नियंत्रण के उपायों की जानकारी भी दी।

केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जसवीर सिंह ने कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके धुएं से आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं, आग लगाने से भूमि में मौजूद मित्र कीट और लाभदायक सूक्ष्मजीव भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। उन्होंने किसानों से फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाने की अपील की। उन्होंने प्राकृतिक खेती के लाभ, प्राकृतिक उत्पादों की मार्केटिंग, कीटनाशक मुक्त सब्जियों, सुरक्षित दुग्ध उत्पादन और स्वस्थ खान-पान के महत्व पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व सदस्य एवं प्रगतिशील किसान महेंद्र सिंह रसीना तथा प्रगतिशील किसान कुलदीप सिंह ने भी अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करने और फसल अवशेषों को आग न लगाने की शपथ ली।

हिन्दुस्थान समाचार / पंकज अत्रे