home page

हांसी : हड़प्पाकालीन धरोहर से रूबरू हुए मुख्यमंत्री, कृत्रिम उत्खनन कर समझी पुरातत्व की बारीकी

 | 
हांसी : हड़प्पाकालीन धरोहर से रूबरू हुए मुख्यमंत्री, कृत्रिम उत्खनन कर समझी पुरातत्व की बारीकी


हांसी : हड़प्पाकालीन धरोहर से रूबरू हुए मुख्यमंत्री, कृत्रिम उत्खनन कर समझी पुरातत्व की बारीकी


हांसी : हड़प्पाकालीन धरोहर से रूबरू हुए मुख्यमंत्री, कृत्रिम उत्खनन कर समझी पुरातत्व की बारीकी


ई-कार्ट में सवार होकर पहुंचे महोत्सव स्थल, प्राचीन

नगर नियोजन और जल प्रबंधन के साक्ष्य देखे

विभागीय प्रदर्शनी व उद्यमियों के स्टॉल का किया

निरीक्षण

खेल प्रतियोगिताओं का शुभारंभ कर खिलाड़ियों का

बढ़ाया उत्साह, ग्राम पंचायत ने पगड़ी पहनाकर किया सम्मानित

हांसी, 19 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री नायब

सिंह सैनी ने राखीगढ़ी महोत्सव के दौरान साेमवार काे हड़प्पाकालीन सभ्यता से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहर

का अवलोकन किया। उन्होंने सरस्वती-सिंधु सभ्यता पर आधारित प्रदर्शनी में प्राचीन नगर

नियोजन, जल प्रबंधन, कृषि व्यवस्था, लेखन कला और तत्कालीन जीवनशैली से जुड़े पुरातात्विक

साक्ष्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कृत्रिम उत्खनन गतिविधि में भाग लेकर पुरातात्विक

अवशेषों की खोज और उनके संरक्षण की प्रक्रिया को भी समझा। इसके बाद वह ई-कार्ट में

सवार होकर महोत्सव स्थल पहुंचे, जहां विभिन्न सरकारी विभागों और उद्यमियों के स्टॉल

का निरीक्षण किया। उन्होंने खेल प्रतियोगिताओं का शुभारंभ कर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन

किया। इस अवसर पर ग्राम पंचायत राखीगढ़ी की ओर से मुख्यमंत्री को पारंपरिक पगड़ी पहनाकर

सम्मानित किया गया और हस्तनिर्मित बैलगाड़ी स्मृति चिह्न के रूप में भेंट की गई।

प्रदर्शनी में प्राचीन सभ्यता के जीवन की झलक

प्रदर्शनी में रखे गए पुरातात्विक साक्ष्यों के

माध्यम से हड़प्पाकालीन सभ्यता की विकसित जीवनशैली और तकनीकी दक्षता को दर्शाया गया।

यहां प्राचीन नगरों की नियोजन व्यवस्था, गलियों की संरचना, जल निकासी प्रणाली, स्नानागार

और जल संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी प्रस्तुत की गई। कृषि व्यवस्था और दैनिक

जीवन में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के माध्यम से उस समय के सामाजिक और आर्थिक जीवन

को समझाने का प्रयास किया गया।

धार्मिक मान्यताओं और शिल्पकला से जुड़े साक्ष्य

प्रदर्शनी में शिवलिंग, स्वास्तिक, पीपल से संबंधित

साक्ष्य, योग परंपरा, पहिए और बैलगाड़ी से जुड़े प्रमाण भी शामिल किए गए। तांबे के

दर्पण, मिट्टी के बर्तन, लेखन सामग्री और पूजा स्थलों से जुड़े अवशेषों ने प्राचीन

समाज की कला, परंपराओं और रहन-सहन के विभिन्न पहलुओं को सामने रखा। हर्बल सफाई उत्पादों

से संबंधित जानकारी और डीएनए अवशेषों के वैज्ञानिक विश्लेषण से जुड़े विषय भी प्रदर्शनी

का हिस्सा रहे। इन सामग्रियों के माध्यम से आगंतुकों को प्राचीन सभ्यता के तकनीकी ज्ञान,

शिल्पकला और दैनिक जीवन की जानकारी दी गई।

कृत्रिम उत्खनन से समझी पुरातत्वविदों की कार्यप्रणाली

मुख्यमंत्री ने कृत्रिम उत्खनन गतिविधि में भाग

लेकर पुरातात्विक खोज की प्रक्रिया को करीब से समझा। इस गतिविधि में दिखाया गया कि

खुदाई के दौरान प्राप्त वस्तुओं की पहचान किस प्रकार की जाती है और उन्हें सुरक्षित

रखकर वैज्ञानिक अध्ययन के लिए कैसे तैयार किया जाता है। पुरातात्विक उत्खनन में सावधानी

और व्यवस्थित प्रक्रिया का विशेष महत्व होता है, क्योंकि मिट्टी के भीतर मिले छोटे-छोटे

अवशेष भी प्राचीन सभ्यता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकते हैं।

राखीगढ़ी जैसे ऐतिहासिक स्थल पर इस तरह की गतिविधियां

आमजन, विशेषकर विद्यार्थियों और युवाओं को पुरातत्व के प्रति जागरूक करने में सहायक

हैं। इससे उन्हें अपनी ऐतिहासिक विरासत को समझने और उसके संरक्षण के महत्व को जानने

का अवसर मिलता है।

उद्यमियों के स्टॉल देखे, खिलाड़ियों को दी शुभकामनाएं

महोत्सव स्थल पर मुख्यमंत्री ने सरकारी विभागों

और उद्यमियों की ओर से लगाए गए स्टॉल का निरीक्षण किया। उन्होंने स्टॉल संचालकों से

उनके उत्पादों, गतिविधियों और उपलब्धियों के बारे में जानकारी ली। ऐसे आयोजन स्थानीय

उत्पादों, पारंपरिक शिल्प और उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ उत्पाद निर्माताओं को

अपने सामान की विशेषताएं लोगों तक पहुंचाने का अवसर देते हैं। इससे स्थानीय कारोबार

और पर्यटन आधारित गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर