सीबीआई ने हिसार से अंतरराष्ट्रीय गिरोह का एजेंट दबोचा, चार युवाओं को भेजा था म्यांमार-कंबोडिया
स्कैम कंपाउंड्स में बंधक बनाकर कराई जाती थी
ऑनलाइन ठगी
क्रिप्टो में मिलता था कमीशन, नौकरी का झांसा,
विदेश में कैद और साइबर ठगी भी
हिसार, 19 अगस्त (हि.स.)। विदेश में शानदार नौकरी,
मोटी तनख्वाह और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर युवाओं को म्यांमार और कंबोडिया के खौफनाक
‘स्कैम कंपाउंड्स’ में पहुंचाने वाले अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी
नेटवर्क पर सीबीआई ने बड़ा शिकंजा कसा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने हिसार से उस मुख्य
एजेंट को गिरफ्तार किया है, जो युवाओं को नौकरी का लालच देकर विदेश भेजता था और बाद
में उन्हें साइबर ठगी के दलदल में धकेल दिया जाता था। जांच में सामने आया है कि आरोपी
ने वर्ष 2025 में हिसार क्षेत्र के कम से कम चार युवाओं को नौकरी के नाम पर म्यांमार
और कंबोडिया भेजा था।
विदेश पहुंचते ही इन युवाओं की जिंदगी नौकरी के
सपने से निकलकर कैद और जबरन साइबर अपराध की दुनिया में पहुंच गई। आरोप है कि स्कैम
कंपाउंड्स में युवाओं को बंधक बनाकर उनसे दिन-रात ऑनलाइन ठगी कराई जाती थी। उन्हें
गिरोह के निर्देशों के मुताबिक लोगों को ठगने के लिए मजबूर किया जाता था। काम से इनकार
करने या भारत लौटने की मांग करने पर कथित तौर पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता था।
सीबीआई ने आरोपी का मोबाइल फोन जब्त कर उसकी फॉरेंसिक
जांच की तो गिरोह के काम करने का तरीका सामने आया। आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम
पर आकर्षक नौकरियों और भारी-भरकम सैलरी के विज्ञापन डालता था। इन विज्ञापनों के जरिए
हिसार और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं को अपने जाल में फंसाया जाता था। युवाओं के
संपर्क में आने के बाद बातचीत को टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप पर ले जाया
जाता था। इसके बाद उन्हें विदेश में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर म्यांमार और कंबोडिया
भेजने की व्यवस्था की जाती थी। सीबीआई को आरोपी के विदेशी स्कैम ऑपरेटरों से संपर्क
के भी अहम सुराग मिले हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि हिसार का आरोपी
अकेले काम नहीं कर रहा था। उसके तार म्यांमार और कंबोडिया में सक्रिय स्कैम ऑपरेटरों
से जुड़े थे। युवाओं को विदेश भेजने के बदले आरोपी को क्रिप्टोकरेंसी के जरिए मोटा
कमीशन मिलने की बात सामने आई है। सीबीआई अब आरोपी के क्रिप्टो वॉलेट, डिजिटल लेन-देन
और विदेशी संपर्कों की पड़ताल कर रही है।
इस पूरे नेटवर्क की सबसे भयावह तस्वीर पीड़ित
युवाओं के बयानों से सामने आई है। सीबीआई को दिए बयानों के अनुसार, स्कैम कंपाउंड्स
में फंसे युवाओं को जबरन साइबर ठगी कराई जाती थी। भारत लौटने के लिए उनसे लाखों रुपये
तक की फिरौती मांगी जाती थी। कुछ मामलों में तो गिरोह ने पीड़ितों के सामने ऐसी शर्त
रख दी कि उनकी जगह भारत से किसी दूसरे युवक को भेजना होगा, तभी उन्हें छोड़ा जाएगा।
यानी नौकरी की तलाश में विदेश गए युवाओं को पहले बंधक बनाया गया और फिर उन्हीं के जरिए
नए युवाओं को जाल में फंसाने का दबाव बनाया गया।
दिसंबर 2025 में शुरू हुई थी जांच
सीबीआई ने मानव तस्करी और साइबर स्लेवरी से जुड़े
इस नेटवर्क के खिलाफ दिसंबर 2025 में पहली एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद जांच का दायरा
बढ़ाया गया। मई-जून 2026 में सीबीआई ने चार राज्यों में गिरोह से जुड़े आठ ठिकानों
पर छापेमारी की और नेटवर्क के तीन प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया। अब बुधवार, 19
अगस्त को हिसार से मुख्य एजेंट की गिरफ्तारी जांच के लिए महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही
है। सीबीआई उसके डिजिटल लेन-देन, क्रिप्टो वॉलेट और विदेशी संपर्कों की जांच कर रही
है। एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि हरियाणा और पंजाब में इस नेटवर्क से जुड़े
कितने अन्य एजेंट सक्रिय हैं और अब तक कितने युवाओं को नौकरी के नाम पर विदेश भेजकर
साइबर अपराध की दुनिया में धकेला गया।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

