हरियाणा मंत्रिमंडल का फैसला: महिला स्टार्टअप को 7 साल तक 100 फीसदी नेट एसजीएसटी वापसी
चंडीगढ़, 13 अगस्त (हि.स.)। हरियाणा ने स्टार्टअप के लिए सब्सिडी और प्रोत्साहन के कई अवसर प्रदान कर दिए हैं। राज्य सरकार अब अपनी सालाना सरकारी खरीद में पात्र हरियाणा-आधारित स्टार्टअप के लिए 10 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित करेगी। यानी स्टार्टअप को केवल कारोबार शुरू करने के लिए मदद नहीं मिलेगी, बल्कि सरकारी विभाग उसके संभावित ग्राहक भी बनेंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा स्टेट स्टार्टअप पॉलिसी-2022 के सप्लीमेंट को मंजूरी दी गई।
नई व्यवस्था में निवेश से लेकर बाजार, सरकारी खरीद और महिला उद्यमिता तक स्टार्टअप के लिए पूरा सपोर्ट सिस्टम खड़ा करने की कोशिश की गई है। किसी निजी या एंजल निवेशक ने स्टार्टअप में 25 लाख रुपये लगाए तो सरकार भी 25 लाख रुपये तक मैचिंग ग्रांट देगी। वहीं कॉरपोरेट कंपनियां किसी स्टार्टअप के साथ पायलट प्रोजेक्ट शुरू करती हैं और उसे आगे बढ़ाकर वास्तविक कॉन्ट्रैक्ट में बदलती हैं तो सरकार 10 लाख रुपये तक की मैचिंग ग्रांट देगी।
स्टार्टअप के सामने सबसे बड़ी चुनौती अक्सर आइडिया या कंपनी शुरू करना नहीं, बल्कि पहला बड़ा ग्राहक हासिल करना होती है। सरकार ने इसी कड़ी को पकडऩे की कोशिश की है। अब पात्र हरियाणा-आधारित स्टार्टअप को सरकारी विभागों की सालाना खरीद में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी का अवसर मिलेगा। इसके साथ कॉरपोरेट सेक्टर को भी स्थानीय स्टार्टअप के साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट सफल रहने पर उसे कॉन्ट्रैक्ट में बदलने पर सरकार 10 लाख रुपये तक की मदद करेगी। यानी नीति का फोकस अब ‘स्टार्टअप बनाओ’ से आगे बढक़र ‘स्टार्टअप को कारोबार दो’ पर है।
महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप के लिए नीति में विशेष पैकेज रखा गया है। उन्हें एक साल तक लीज रेंट का 50 प्रतिशत, अधिकतम 10 लाख रुपये तक, वापस मिलेगा। साथ ही सात साल तक नेट एचजीएसटी की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति होगी। इसकी सीमा फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट के 100 प्रतिशत तक रहेगी। सामान्य स्टार्टअप के लिए नेट एचजीएसटी की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति सात साल तक जारी रहेगी।
स्टार्टअप में शुरुआती पूंजी की कमी दूर करने के लिए सीड फंड मैचिंग का प्रावधान किया गया है। निजी या एंजल निवेशक से 25 लाख जुटाने पर सरकार भी 25 लाख तक की मैचिंग ग्रांट दे सकेगी।
पांच साल तक क्लाउड खर्च में भी राहत
टेक्नोलॉजी स्टार्टअप के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा स्टोरेज का खर्च भी नीति के दायरे में लाया गया है। हरियाणा आधारित स्टार्टअप भारत के किसी भी डेटा सेंटर पर हुए ऐसे खर्च का 75 प्रतिशत, अधिकतम ₹2.5 लाख सालाना, पांच साल तक वापस ले सकेंगे। एक और अहम बदलाव के तहत चंडीगढ़ में रजिस्टर्ड स्टार्टअप को भी हरियाणा की स्टार्टअप नीति में कैटेगरी-2 स्टार्टअप माना जाएगा। इससे वे नीति के तहत उपलब्ध लाभ हासिल कर सकेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

