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यमुनानगर:बजट पर सियासी मतभेद, सत्ता पक्ष ने बताया विकास का रोडमैप, तो विपक्ष ने उठाए सवाल

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यमुनानगर:बजट पर सियासी मतभेद, सत्ता पक्ष ने बताया विकास का रोडमैप, तो विपक्ष ने उठाए सवाल


यमुनानगर:बजट पर सियासी मतभेद, सत्ता पक्ष ने बताया विकास का रोडमैप, तो विपक्ष ने उठाए सवाल


यमुनानगर, 02 मार्च (हि.स.)। वर्ष 2026-27 के वार्षिक बजट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सत्तारूढ़ नेताओं ने इसे जनहित और विकासोन्मुख बजट बताया, जबकि विपक्ष ने कई अहम क्षेत्रों में ठोस प्रावधानों के अभाव का आरोप लगाया है। कैबिनेट मंत्री श्याम सिंह राणा ने साेमवार काे कहा कि बजट किसानों और कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने वाला है। कृषि एग्री डिस्कॉम की स्थापना, फसल सुरक्षा योजनाओं को सुदृढ़ करने तथा प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने जैसे फैसले किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होंगे। सिंचाई संसाधनों के विस्तार की घोषणा को भी उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

यमुनानगर से विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने बजट को राज्य के समग्र विकास का ब्लूप्रिंट बताते हुए कहा कि इसमें युवाओं के लिए शिक्षा सुधार, रोजगार के अवसरों का विस्तार और खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं देने का प्रावधान किया गया है। पूर्व मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने इसे विकसित हरियाणा-2047 के लक्ष्य की दिशा में मजबूत कदम बताते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और किसान कल्याण योजनाओं को सकारात्मक पहल बताया है।

भाजपा जिला अध्यक्ष राजेश सपरा ने कहा कि बजट संतुलित, समावेशी और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह बजट ग्रामीण विकास, आधारभूत ढांचे और शिक्षा-स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को प्रदेश की प्रगति के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता राय सिंह गुर्जर ने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि किसान, मजदूर और सामाजिक ढांचे से जुड़े मूल मुद्दों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिली। उन्होंने प्रदेश पर बढ़ते कर्ज, ग्रामीण रोजगार योजनाओं में सीमित आर्थिक समर्थन और पेयजल गुणवत्ता सुधार के लिए स्पष्ट योजना के अभाव पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि किसानों की उत्पादन लागत और बाजार मूल्य के अंतर को संतुलित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी थी। साथ ही सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था और मिड-डे मील योजना को मजबूत करने के लिए ठोस नीति अपेक्षित थी। विपक्ष ने बजट में घोषणाओं के बजाय जमीनी परिणाम सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार