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संयुक्त मोर्चा ने फैसले को बताया काला दिन

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- आंदोलन के लिए बुलाई करनाल में आपात बैठक

चंडीगढ़, 19 अक्टूबर (हि.स.)। हरियाणा बिजली नियामक आयोग द्वारा गुरुग्राम और नूंह जिलों के लिए इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को 25 वर्षों की अवधि के लिए समानांतर वितरण लाइसेंस दिए जाने के फैसले से प्रदेशभर के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों में भारी आक्रोश है। हरियाणा पावर एम्प्लॉइज एवं इंजीनियर्स संयुक्त मोर्चा ने सर्वसम्मति से आज के दिन को हरियाणा के इतिहास में काला दिन करार दिया है। इस संबंध में करनाल में आपात बैठक बुलाई गई है।

संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों के अनुसार गुरुग्राम और नूंह जैसे उच्च राजस्व वाले औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों को निजी कंपनी के हवाले करना सीधे तौर पर सरकारी बिजली निगमों की कमर तोड़ने जैसा है और आने वाले समय में बाकी जिलों को भी प्राइवेट कंपनियों के हवाले करने की सरकार की योजना है।

इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक एवं पूर्व वित्त मंत्री प्रो़ संपत सिंह ने इस फैसले का विरोध किया है। उन्होंने इसे सार्वजनिक बिजली क्षेत्र, किसानों, ग्रामीण उपभोक्ताओं और गरीब परिवारों के हितों पर चोट बताते हुए पिछला दरवाजा निजीकरण करार दिया है। उनका कहना है कि एक ही क्षेत्र में सरकारी निगम और निजी कंपनी को बिजली वितरण की अनुमति देने से लाभदायक औद्योगिक, वाणिज्यिक और शहरी उपभोक्ताओं को निजी कंपनी चुन सकती है, जबकि किसानों, ग्रामीण इलाकों और रियायती श्रेणियों को बिजली देने का वित्तीय बोझ डीएचबीवीएन पर बना रहेगा। इससे क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था कमजोर होने, सरकारी निगम की आय घटने, सब्सिडी का बोझ बढ़ने और भविष्य में बिजली दरों पर दबाव पड़ने की आशंका है। संपत सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि बिजली वितरण में सीमित प्रमाणित अनुभव वाली कंपनी को 25 साल का लाइसेंस क्यों दिया गया। उन्होंने सार्वजनिक निवेश, ग्रामीण विद्युतीकरण और सभी वर्गों को समान सेवा देने की जिम्मेदारी पर भी जवाब मांगा। उनके मुताबिक, बिजली जैसी बुनियादी सेवा में प्रतिस्पर्धा के नाम पर निजी मुनाफे को प्राथमिकता देना जनहित के खिलाफ है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा