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स्पीकर के नाेटिस पर हुड्डा का जवाब, केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र वाले विषय पर नहीं बुला सकते विशेष सत्र

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चंडीगढ़, 11 मई (हि.स.)। हरियाणा विधानसभा के स्पीकर हरविंद्र कल्याण द्वारा जारी किए नोटिस का जवाब देते हुए नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाले विषय पर विशेष सत्र नहीं बुलाया जा सकता।

स्पीकर ने हुड्डा से पूछा था कि 27 अप्रैल को विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र को किस नियम के तहत उन्होंने असंवैधानिक बताया था और किस अधिकार अथवा नियम के तहत विधानसभा परिसर में विधायकों को इकट्टा करते हुए समानांतर सदन की कार्यवाही का संचालन किया था।

हरियाणा सरकार ने इस दिन नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए एक दिवसीय सत्र बुलाया था, जिसका कांग्रेस ने यह कहते हुए बहिष्कार किया था कि लोकसभा में यह बिल गिर चुका है और इस पर अब विधानसभा में चर्चा नहीं की जा सकती। हु़ड्डा ने अपने जवाब में कहा कि भाजपा सरकार संवैधानिक संस्थाओं का स्वयं मजाक उड़ा रही है। महिला आरक्षण का मुद्दा केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है, राज्य सरकार का नहीं। इसलिए राज्य सरकार द्वारा सत्र बुलाना पूरी तरह से असंवैधानिक था।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में उसी दिन कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में समानांतर सदन चलाते हुए हरियाणा की भाजपा सरकार पर जनता के हितों की अनदेखी करने के आरोप लगाए थे। विधानसभा स्पीकर हरविन्द्र कल्याण ने इस संंबध में स्थिति स्पष्ट करने के लिए विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा को नोटिस भेजा था, जिसके बाद हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक राज्यपाल से मिलने गए थे।

भूपेंद्र हुड्डा ने स्पीकर से कहा कि समनिंग और प्रोसेडिंग दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा के अधिकार क्षेत्र का विषय है। यह बिल लोकसभा में गिर चुका था। ऐसे में उस पर चर्चा के लिए हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाना पूरी तरह से असंवैधानिक था। उन्होंने कहा कि विधानसभा की समानांतर कार्यवाही का संचालन हमारा प्रिवेलज है। इस पर रोक नहीं लगाई जा सकती। उन्होंने कहा कि भाजपा की नीयत ठीक होती तो मौजूदा 543 सांसदों में ही आरक्षण देकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू किया जा सकता था।

हुड्डा ने अपने जवाब में कहा कि महिलाओं को राजनीति में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून सितंबर 2023 में संसद के दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से पास कर दिया था। इस पर राष्ट्रपति से भी मुहर लग चुकी है। यह कानून संविधान का अभिन्न अंग बन चुका है। बावजूद इसके तीन साल बाद भी भाजपा ने इसे लागू नहीं किया। यहां तक आरक्षण विधेयक को 30 महीने के बाद अधिसूचित किया गया। आरक्षण को अधिक लटकाने के मकसद से सरकार ने जानबूझकर संसद में परिसीमन बिल पेश किया और उसमें साजिश के तहत महिला आरक्षण को जोड़ दिया, जो कि न्यायोचित नहीं था।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा