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हरियाणा के पानीपत से शुरू हुए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के आए सकारात्मक परिणाम

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-‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के 11 साल: जन्म के समय लिंगानुपात 918 से बढ़कर 929 हुआचंडीगढ़, 17 अगस्त (हि.स.)। हरियाणा का पानीपत 11 साल पहले शुरू हुए ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान का गवाह रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को पानीपत से इस अभियान की शुरुआत की थी। अब 11 साल बाद संसद में पेश आंकड़ों से पता चला है कि अभियान के बाद देश में जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार हुआ है और स्कूलों में लड़कियों की संख्या भी बढ़ी है।महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान के दौरान देश में जन्म के समय लिंगानुपात 918 से बढ़कर 929 हो गया है । वहीं, माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात 2014-15 के 75.51 फीसदी के मुकाबले बढक़र 2024-25 में 83.4 फीसदी पहुंच गया है।इस अभियान की शुरुआत उस समय हुई थी जब बेटियों के जन्म को लेकर सामाजिक असमानता बड़ी चुनौती थी। प्रधानमंत्री मोदी ने पानीपत से इसकी शुरुआत करते हुए बेटियों के जन्म, संरक्षण और शिक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता से जोड़ा था। बाद में अभियान को स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास जैसे क्षेत्रों से जोड़ते हुए देश के सभी जिलों तक विस्तार दिया गया। फिलहाल यह ‘मिशन शक्ति’ के तहत संचालित हो रहा है। सरकार ने संसद में बताया कि जून 2026 तक अभियान पर 1,075.37 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस अवधि में देशभर में 78,305 कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें 3.37 करोड़ से अधिक लोगों की भागीदारी रही। इनका उद्देश्य बेटियों के जन्म, शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक स्वीकार्यता को लेकर जागरूकता बढ़ाना रहा।

लिंगानुपात और शिक्षा में बदलाव के पीछे स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तीकरण से जुड़े अन्य कार्यक्रमों की भी भूमिका रही है। सांसदों ने अभियान की उपलब्धियों के साथ उसके प्रभाव और मूल्यांकन की जानकारी भी मांगी थी। नीति आयोग ने 2020 और 2025 में स्वतंत्र मूल्यांकन कराया। दोनों आकलनों में अभियान को प्रभावी बताया गया और इसके क्रियान्वयन को और बेहतर बनाने के लिए सुझाव दिए गए। 2015 में चुनिंदा जिलों से शुरू हुई मुहिम अब देशव्यापी अभियान बन चुकी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा