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हिसार :गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर को सर्वश्रेष्ठ अकादमिक पुरस्कार

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हिसार :गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर को सर्वश्रेष्ठ अकादमिक पुरस्कार


फिजियोथेरेपी की सहायक प्रोफेसर ने अकादमिक सत्र

की अध्यक्षता भी की

साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा और पुनर्वास विज्ञान

के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देता यह पुरस्कार

हिसार, 22 अप्रैल (हि.स.)। हरियाणा के गुरु जम्भेश्वर

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत गौरव के क्षण में, फिजियोथेरेपी

विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. कालिंदी देव को ‘उन्नत स्वास्थ्य सेवा एवं पुनर्वास विज्ञान

पर राष्ट्रीय सम्मेलन’ (एनसीएएचआरएस-एआईआईएमएस-2026) में प्रतिष्ठित ‘सर्वश्रेष्ठ अकादमिक पुरस्कार’ (उत्कृष्टता पुरस्कार)

से सम्मानित किया गया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस), नई दिल्ली

में आयोजित यह दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘बहु-विषयक देखभाल को पुनर्परिभाषित करना:

उन्नत स्वास्थ्य सेवा के लिए साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण’ विषय के तहत आयोजित

किया गया था। इस कार्यक्रम ने पूरे देश से अग्रणी चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों

और पुनर्वास विशेषज्ञों को एक मंच पर एकत्रित किया, ताकि रोगी देखभाल के लिए अत्याधुनिक

और एकीकृत दृष्टिकोणों पर विचार-विमर्श किया जा सके।

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बुधवार काे डॉ. कालिंदी

देव को बधाई दी और कहा कि इस तरह की राष्ट्रीय स्तर की मान्यताएं स्वास्थ्य विज्ञान

के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के बढ़ते कद और ऐसे पेशेवर तैयार करने पर उसके फोकस को

दर्शाती हैं, जो भारत के स्वास्थ्य सेवा तंत्र में सार्थक योगदान दे सकें।

पुरस्कार प्रशस्ति पत्र में स्पष्ट रूप से डॉ.

कालिंदी देव को ‘स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान और विशिष्ट सेवा

के लिए’ मान्यता दी गई है,

और उनकी ‘समर्पण और पेशेवर उत्कृष्टता’ की सराहना की गई है। आयोजन अध्यक्ष डॉ. अविनाश चक्रवर्ती

(प्रोफेसर, राष्ट्रीय वृद्धावस्था केंद्र, एआईआईएमएस) और आयोजन सचिव डॉ. अविनाश बी.

धारगावे (मुख्य फिजियोथेरेपिस्ट, राष्ट्रीय वृद्धावस्था केंद्र, एआईआईएमएस) द्वारा

हस्ताक्षरित यह प्रमाण पत्र समापन सत्र के दौरान प्रदान किया गया।

उनकी उपलब्धि में एक और विशिष्टता जोड़ते हुए,

डॉ. कालिंदी देव ने सम्मेलन में एक वैज्ञानिक सत्र की सफलतापूर्वक अध्यक्षता भी की।

सत्र अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका में उच्च-स्तरीय अकादमिक विचार-विमर्श का संचालन

करना, साक्ष्य-आधारित चर्चाओं को सुगम बनाना और फिजियोथेरेपी तथा पुनर्वास विज्ञान

के क्षेत्र के राष्ट्रीय विशेषज्ञों के बीच विचारों के सार्थक आदान-प्रदान को सुनिश्चित

करना शामिल था।

एनसीएएचआरएस-एआईआईएमएस सम्मेलन को पुनर्वास विज्ञान

के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण अकादमिक मंचों में से एक माना जाता है, जिसमें प्रमुख

चिकित्सा संस्थानों, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संगठनों के प्रतिनिधि भाग लेते हैं।

यह सम्मान न केवल डॉ. देव की पेशेवर पहचान को

ऊँचा उठाता है, बल्कि गुजविप्रौवि, हिसार को भी हेल्थकेयर शिक्षा और रिसर्च को आगे

बढ़ाने वाले संस्थानों के राष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करता है। जैसे-जैसे

भारत एक अधिक समग्र और मल्टीडिसिप्लिनरी हेल्थकेयर ढांचे की ओर बढ़ रहा है, इस तरह के

सम्मान मरीजों की देखभाल के भविष्य को संवारने में फिजियोथेरेपिस्टों और पुनर्वास वैज्ञानिकों

द्वारा निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर