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हिसार : भारतीय ज्ञान व्यवस्था की गुरु-शिष्य परंपरा आज की इंटर्नशिप व्यवस्था का मूल रूप : डॉ. विजय कुमार

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हिसार : भारतीय ज्ञान व्यवस्था की गुरु-शिष्य परंपरा आज की इंटर्नशिप व्यवस्था का मूल रूप : डॉ. विजय कुमार


ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल के सौजन्य

से शुरू हुए पांच दिवसीय ‘इंटरनोत्सव-2026’ में बोले कुलसचिव

हिसार, 28 अप्रैल (हि.स.)। गुरु जम्भेश्वर

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. विजय कुमार ने कहा है कि भारतीय

ज्ञान व्यवस्था की गुरु-शिष्य परंपरा आज की इंटर्नशिप व्यवस्था का मूल रूप है। आधुनिक

विश्व के विकास की मूल सीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा ही है। हमें इसे फिर से स्थापित करना

होगा।

कुलसचिव डा. विजय कुमार मंगलवार काे गुजविप्रौवि

के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल के सौजन्य से शुरू हुए पांच दिवसीय ‘इंटरनोत्सव-2026’

के दूसरे दिन के उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे। जिंदल हस्पताल,

हिसार की चिकित्सा निदेशक डा. रितु चौपड़ा विशिष्ट अतिथि के रूप उपस्थित रही। गुजविप्रौवि

के डीन एल्मुनाई रिलेशंस प्रो. कर्मपाल नरवाल विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अध्यक्षता ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल के निदेशक डा. प्रताप सिंह ने की। इस अवसर पर

सहायक निदेशक प्लेसमेंट डा. आदित्य वीर सिंह मंच पर उपस्थित रहे।

कुलसचिव डा. विजय कुमार ने कहा कि

तक्षशिला और नालंदा जैसे महान विश्वविद्यालय केवल दर्शन और ज्ञान के केंद्र ही नहीं

थे, बल्कि कौशल वृद्धि के केंद्र भी थे। भारतीय ज्ञान व्यवस्था में 64 ऐसी कलाएं थी,

जिनमें व्यक्तियों को निपुण करने का प्रयास किया जाता था।

विशिष्ट अतिथि डा. रितु चौपड़ा ने एबीसी

के सिद्धांत को समझाते हुए विद्यार्थियों से कहा कि वे जिस भी संस्थान में इंटर्नशिप

के लिए जाएं, उस संस्थान के हर कार्य के लिए हर समय उपस्थित (एवेलेबल) रहें। अपने व्यवहार

(बिहेवियर) को विनम्र तथा मित्रवत रखें तथा अपनी क्षमता (कंपीटेंसी) का शत प्रतिशत

प्रयोग करें तथा इसे लगातार बढ़ाएं।

निदेशक डॉ. प्रताप सिंह ने अपने स्वागत

संबोधन में बताया कि ‘इंटर्न-उत्सव’ के दूसरे दिन 18 संस्थानों में 400 से अधिक विद्यार्थियों

ने साक्षात्कार में भाग लिया।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर